आपसी सौहार्द एवं सदभावना का प्रतीक है पीर बाबा का मजार।
सानू कुमार
महेशपुर प्रखंड के गमछानाला मौजा के पीरपहाड़ स्थित पीर हजरत अब्दुल रहीम शाह अली दरवेश की मजार सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है. इस मजार पर हर वर्ष के भांति इस वर्ष भी 4 व 5 तारीख को पीर मजार व उर्स मेला का धार्मिक जलसा सह चादर पोशी का आयोजन किया गया है. वही उर्स मेला के कमेटी के अध्यक्ष सहमत शेख, सचिव कुर्बान अंसारी, कोषाध्यक्ष मुसारफ अंसारी से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि पीर मजार की स्थापना आज से लगभग 300 से 400 साल पहले पूर्व अंग्रेजों के शासन काल के समय ही हुई थी. पीर पहाड़ स्थित पीर मजार पर वर्ष 1932 से यहां हर साल फरवरी माह में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इस मौके पर बिहार, पश्चिम बंगालज़ झारखंड, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुगण इस दरबार पर माथा टेकने पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि इस मजार के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहां सच्चे मन से मन्नतें मांगते हैं. उनकी मुरादें यहां अवश्य पूरी होती है. मुरादे पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा बाबा के मजार पर चादर पोशी की जाती है. यह पीर मजार दशकों से देख-रेख के अभाव में जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गया था. लेकिन एक समुदाय विशेष के लोगों के बीच आस्था जगी और इस धार्मिक स्थल को वर्ष 1932 में एक नया रूप मिला. तब से इस मजार के सौंदर्य और इसके प्रति आस्था रखने वालों की संख्या में समय बीतने के साथ-साथ बढ़ोतरी हुई है.






