नगर परिषद कार्यालय के बाहर सैकड़ों समर्थकों के साथ धरना, 11 वार्डों की योजनाओं की जांच और वर्क ऑर्डर रोकने की मांग।
पाकुड़। नगर परिषद की दो करोड़ की सड़क योजना को लेकर विवाद अब सड़क पर उतर आया है। योजना चयन में भेदभाव और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए वंचित पार्षदों ने सोमवार को नगर परिषद कार्यालय के समक्ष मोर्चा खोल दिया। सैकड़ों समर्थकों की मौजूदगी में सुबह 10 बजे से धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ, जो खबर लिखे जाने तक जारी था। पार्षदों ने 11 वार्डों की चयनित योजनाओं की वैधता की जांच कराने और नगर परिषद के सभी 21 वार्डों में नए सिरे से योजना चयन की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरना, चक्काजाम और कार्यालय में तालाबंदी तक ले जाया जाएगा।
11 वार्डों की योजनाओं पर सवाल, पहले जांच फिर काम की मांग
धरना दे रहे पार्षदों का आरोप है कि दो करोड़ की सड़क योजना के चयन में सभी वार्डों को समान अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि स्थायी समिति से पारित 11 वार्डों की योजनाओं की वैधता और नियमसम्मतता की निष्पक्ष जांच जरूरी है। पार्षदों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि विभागीय मंतव्य प्राप्त होने तक संबंधित योजनाओं के एकरारनामा, कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) और आगे की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़ी योजनाओं में किसी वार्ड की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित निविदाओं को रद्द कर सभी 21 वार्डों के लिए नियमानुसार नए सिरे से योजना चयन किया जाए।

पहले भी दिया आवेदन, अब आर-पार की चेतावनी।
पार्षदों के मुताबिक, इस मामले में पहले भी कई बार आवेदन और अभ्यावेदन देकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी के बीच सोमवार को धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि विकास योजनाओं का लाभ सभी वार्डों को मिलना चाहिए और चयन प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित समय में न्यायसंगत निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसके तहत अनिश्चितकालीन धरना, चक्काजाम और नगर परिषद कार्यालय में तालाबंदी जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य अशांति फैलाना नहीं, बल्कि योजना चयन में पारदर्शिता और सभी वार्डों के साथ न्याय सुनिश्चित कराना है।
इन पार्षदों ने उठाई आवाज
इस मांग को लेकर आगे आए पार्षदों में रुपाली सरकार (वार्ड-4), भीम सिंह (वार्ड-13), मिथुन मरांडी (वार्ड-1), किरण कापरी (वार्ड-3), असलम अंसारी (वार्ड-12), उज्ज्वल हरि (वार्ड-2) और आलमगीर अंसारी (वार्ड-17) शामिल हैं।
ज्ञापन की प्रतिलिपि नगर विकास विभाग, झारखंड के प्रधान सचिव, पाकुड़ के अनुमंडल पदाधिकारी और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को भी भेजी गई है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यह है कि दो करोड़ की सड़क योजना पर उठे सवालों की जांच होगी और सभी 21 वार्डों को समान अवसर देने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाएगा।








