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October 15, 2026 8:41 am

नव प्राथमिक विद्यालय संग्रामपुर उत्तरटोला में 367 बच्चों का भविष्य मात्र दो शिक्षकों के भरोसे।

विद्यालय में बाउंड्री वॉल की जरूरत, स्कूल के समीप ही है एक बड़ा नाला जो सुरक्षा के लिहाज से काफी खतरनाक।

367 बच्चों के लिए मात्र 6 क्लास रूम

यासिर अराफ़ात

पाकुड़ : शिक्षा द्वारा हमें नैतिक मूल्यों, समाज सेवा की भावना, सामाजिक न्याय, और समरसता के महत्व को समझने में मदद मिलती है। शिक्षित लोग समाज की समस्याओं के समाधान में योगदान करते हैं, सामाजिक बदलाव को प्रोत्साहित करते हैं, और समाज के उद्धार में योगदान करते हैं। शिक्षा मानव जीवन के हर पहलू पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। परंतु पाकुड़ जिला के सरकारी विद्यालयों की स्थिति यह साफ दर्शा रहा है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधेरे में जा रहा है.नव प्राथमिक विद्यालय संग्रामपुर उत्तरटोला इन दिनों शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालय में पढ़ने वाले 367 बच्चों का भविष्य मात्र दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा . मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय में कुल 367 छात्र हैँ. 367 छात्रों का भविष्य मात्र दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा है.दो शिक्षकों में से शरीफुल शेख प्रधान अध्यापक है तथा दूसरा शिक्षक मंजरुल इस्लाम है.प्रधान अध्यापक को अक्सर सरकारी कागजों की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिला की तरफ दौड़ लगाना पड़ता है. जिससे अक्सर वे बच्चों की क्लास नहीं ले पाते हैं. इस सरकारी विद्यालय में अक्सर गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं. उनके अभिभावक की इतनी समर्थता नहीं कि वे अपने बच्चों को किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सके. विद्यालय के अंदर सबसे बड़ी परेशानी बच्चों के बैठने का क्लासरूम की है. 367 बच्चों के बैठने के लिए मात्र 6 क्लास रूम में. जो पर्याप्त नहीं है.इन 6 क्लास रूम के अंदर ही 367 बच्चे किसी तरह बैठते हैं. जानकारी लेने पर प्रधान अध्यापक ने कहा कि छात्रों के बैठने का पर्याप्त क्लासरूम नहीं होने के कारण काफी दिक्कत होती है. छात्रों की संख्या के अनुसार और चार क्लासरूम की आवश्यकता है. विद्यालय के सामने एक छोटी सी नाली है जिसमें ज्यादातर समय पानी भरा हुआ रहता है. बाउंड्री वॉल नहीं रहने के कारण छोटे-छोटे बच्चे नाले के किनारे चले जाते हैं. जिससेविद्यालय के अध्यापक हमेशा इस बात से चिंतित रहते हैं कि बच्चों के साथ कोई बड़ी दुर्घटना ना हो जाए. बच्चों की सुरक्षा हेतु बाउंड्री वॉल का निर्माण कराना अति आवश्यक है. क्योंकि आज अगर हमने इन 367 बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोचा तो आने वाले दिनों में इन्हीं बच्चों में से कोई एक बच्चा हो सकता है कि पूरा देश का नाम रोशन करें. इसीलिए शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु इस विद्यालय की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करना बेहद जरूरी है.

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