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May 1, 2026 5:23 am

पाकुड़ जिले के किसानों का दर्द: सिंचाई, खाद-बीज और बाजार की कमी से जूझ रही कृषि

सरकारी उपेक्षा से किसानों की आर्थिक स्थिति खराब, बेहतर सिंचाई और बाजार की दरकार

यासिर अराफात

पाकुड़ : रोटी कपड़ा और मकान यह तीनों चीज एक इंसान को जिंदगी जीने के लिए चाहिए ही चाहिए. जो अन्न जिंदगी गुजारने के लिए हम खाते हैं और जीवित रहते हैं उस अन्न को हम तक पहुंचाने वाला देश के अन्नदाता किसान है. पाकुड़ जिला कृषि प्रधान जिला माना जाता है. यहां के अक्सर लोग कृषि पर निर्भर रहते हैं. सीजन के हिसाब से अलग-अलग फसलों की खेती करते हैं. अपनी भूख मिटाने के लिए जो खाना हम खाते हैँ उसमें करोड़ों किसानों का पसीना छुपा हुआ रहता है. पाकुड़ जिला के किसानों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है. सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि यहां के किसानों की खेती के लिए सिंचाई का सरकार की तरफ से बेहतर प्रबंध ही नहीं है. जिसके चलते सीजन में खेती करने में किसानों को इतनी दिक्कत होती है कि वे ईश्वर को छोड़कर किसी के शरण में नहीं आते. ईश्वर ने अगर आसमां से पानी बरसाया तो किसानों की किस्मत चमकी नहीं तो यूं ही सरकार के भरोसे किसानों की फसलें बस इस इंतजार में रहती है कि काश कि सरकार हमारी ऒर ध्यान दे दे. हालांकि सरकार द्वारा मनरेगा योजना के माध्यम से खेतों में सिंचाई कूप तथा तालाब का निर्माण करवाया जाता है. परंतु गर्मी के सीजन में खेत के अंदर सभी तालाब में सुख जाते हैं. एक बूंद बराबर पानी नहीं रहता.कुल मिलाकर अगर बात की जाए तो पाकुड़ जिला में जितने भी किसान है और इन किसानों के जो खेत है ,पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का प्रबंध नहीं है. जिसके चलते किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है. दूसरी सबसे अहम बात जब खेत में फसल हो जाती है,उस फसल को बेचने के लिए पश्चिम बंगाल के ब्रोकर जिसे दलाल कहा जाता है,विवश होकर किसानों को कम मूल्य में अपनी फसल बेचनी पड़ती है.यानी कि पाकुड़ जिला में किसानों की फसल खरीदने के लिए कोई बाजार नहीं है. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन घटती जा रही है. जिला में कृषि विभाग का कार्यालय तो है. परंतु इतने छोटे से जिले के किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद बीज का प्रबंध ही नहीं है. किसान मजबूरन बाजार से खाद और बीज खरीदते हैं. कुल मिलाकर इसका सारांश यह निकलता है कि किसानों के हित के लिए अगर सरकार को सोचना है तो, इनकी खेती के लिए बेहतर से बेहतर सिंचाई का प्रबंध करना, सभी किसानों के लिए खाद और बीज उपलब्ध कराना, अपनी फसल को बेहतर मूल्य में बेचने के लिए पाकुड़ जिला में बाजार निर्माण करना. यह तीन चीज अगर हो जाती है तो किसानों के लिए खुशहाली आने से कोई नहीं रोक सकता. सिवाए ईश्वर के।

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