पाकुड़। सावन शुरू होते ही पाकुड़ जिले का माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है। पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में कांवरियों का जत्था वाहनों से होकर पाकुड़ के रास्ते सुल्तानगंज के लिए रवाना हो रहा है। भगवा वस्त्र धारण किए श्रद्धालुओं के “बोल-बम”, “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख सड़कें दिनभर गूंज रही हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से पूरे इलाके में भक्ति का वातावरण बन गया है।
इस वर्ष बांग्ला और बिहारी सावन की तिथियों में अंतर होने के कारण पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं की यात्रा पहले ही शुरू हो गई है। बांग्ला पंचांग के अनुसार सावन 18 जुलाई से प्रारंभ होकर 17 अगस्त तक रहेगा, जबकि बिहार में सावन का आरंभ कुछ दिनों बाद होगा। इसके बावजूद शिवभक्तों की आस्था में कोई अंतर नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करना है।
बांग्ला सावन में इस बार पांच सोमवारी का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत शुभ मान रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन केवल एक महीना नहीं, बल्कि भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र अवसर है। इसी आस्था के साथ हजारों कांवरिये लंबी यात्रा पर निकल पड़े हैं। पाकुड़ होकर गुजर रहे इन केसरिया जत्थों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है। सड़क पर जहां नजर जाती है, वहां भगवा वस्त्रों में शिवभक्त दिखाई दे रहे हैं। आस्था और उत्साह का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि बिहार के सावन की शुरुआत के बाद कांवरियों की संख्या में और वृद्धि होगी।





