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May 6, 2026 12:55 pm

उधार की कसौटी पर टिकी है बांस की टोकरी सूप बनाने वाले शिल्पकार की जिंदगी

सतनाम सिंह

ना बिक्री ना बाजार, परिवार है लाचार कर रहे हैं पलायन

पाकुड़। जिले के कई गांव के सैकड़ों मोहाली परिवार की जिंदगी आज भी बांस की टोकरी, सूप आदि पर निर्भर है। वे बांस खरीद कर उससे सुप, टोकरी, खंचिया, हाथ पंखा, झांड़ू, डाली, छोपी और शादी के कई सामान बनाकर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। इन सामानों को स्थनीय साप्ताहिक हाट बाजार में बेचते हैंऔर इससे अपना गुजर-बसर करते हैं। इनकी बदहाली और तंगी हाल से सबक लेते हुए इनके परिवार के बच्चे ही अब अपने इस परंपरागत पेशे से दूर होते चले जा रहे हैं। सरकार और जिला प्रशासन की नजर इन पर कभी नहीं पड़ी। परिवार के पुराने लोग आज भी इसी रोजगार पर टिके हुए हैं।. प्रखंड के चंद्रपूरा, शहरग्राम, छक्कूधड़ा, आढोल, डोमनाबांध , हॉट पोखरिया , हिरणपुर के कई क्षेत्र के गांव में लगभग 100 से अधिक मोहली परिवार के हजारों की आबादी निवास करते हैं और इनकी जिंदगी उधार की कसौटी पर टिकी है।

राेजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं युवक

अपनी परिवारिक स्थिति को देखते हुए इनके बाल बच्चे पुश्तैनी काम छोड़कर रोजगार जिले छोड़कर अन्य जिलों में पलायन कर रहे हैं। शिक्षित नहीं रहने के कारण ये मजदूर वर्ग तक ही सीमित रह जाते हैं। मोहली परिवार बड़ी मेहनत और लगन से उधार लेकर बांस लाते हैं और बांस की समान बनाते हैं। किंतु इन्हें बेचने के लिए ना उन्हें वाजिब दाम मिल पाता है ना बाजार। बताते हैं कि एक बांस में एक आदमी दो-तीन दिनों तक मेहनत करता है।तब जाकर उससे तीन चार टोकरी, सुप आदि बनती है। 100 से 200 रुपये में एक बांस खरीद कर लाते हैं।उसमें तीन दिन मेहनत करते हैं, उसके बाद क्षेत्र के कई साप्ताहिक हाट में बेचने का काम करते हैं।

उधार में बांस लेकर बनाते हैं सामान, बेचने पर देते हैं पैसा
वही तुरक मोहली, सातु मोहली, शिवलाल मोहली, जेरमेन मोहली, कोमोस्ता मोहली, परगना मोहली, लुपा मोहली, शिवधन मोहली सहित अन्य मोहली परिवारों ने बताया कि पूंजी के अभाव में एक तो बांस उधार में लेना पड़ता है. दूसरा टोकरी बेचकर बांस वाले को उधारी चुकता करना कभी- कभी मुश्किल हो जाता है। अपने बाल -बच्चों को लेकर दिन रात मेहनत -मजदूरी के बाद कुछ ही पैसा बच पाता है। जिससे घर चलाना भी बड़ी मुश्किल होता है।बताया कि पहले गांव घर में चावल रखने के लिए बांस का बना डेमनी का खूब डिमांड रहता था.।

स्टील प्लास्टिक टीना ने बिगाड़ा खेल

जैसे-जैसे स्टील प्लास्टिक टीना आदि के समान टोकरी ड्रम छकनी आदि बनने लगे धीरे-धीरे बांस के बने सामान का जगह लेते गए। स्टील प्लास्टिक आदि के बने सामान से सस्ती और अधिक टिकाऊ होती है। इसलिए धीरे-धीरे इसका प्रचलन बढ़ता गया और बांस का बने सामान का प्रचलन घटता गया। जिस वजह से आज मोहली परिवार को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है और यह पलायन कर रहे हैं ।सरकार और जिला प्रशासन को इस पर सुध लेना चाहिए ताकि इनका जीवन स्तर सुधार हो सके

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