- लोगों के जीवन की रक्षा करने वाले खुद ही हैं असुरक्षित : डॉ० अशोक कुमार
गोड्डा : चिकित्सकों की सुरक्षा की मांग को लेकर जिले के तमाम चिकित्सक बुधवार को एक दिवसीय कार्य बहिष्कार पर रहे। आकस्मिक सेवा को छोड़कर अन्य सभी चिकित्सा सेवा जिले भर में सरकारी एवं निजी अस्पतालों में बंद रहे। चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के कारण मरीजों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। इस दौरान सदर अस्पताल का ओपीडी सेंटर पूर्णत: सुनसान नजर आए। वहीं प्राइवेट क्लीनिक में भी मरीजों की उपस्थिति नगण्य रही, लेकिन मरीज इलाज को लेकर इधर-उधर भटकते रहे। इधर जिले के चिकित्सक मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर आईएमए हॉल में एकत्रित हुए जहां उन्होंने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए आवाज बुलंद की। मुख्यालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ० अशोक कुमार ने कहा कि दूसरों के प्राणों की रक्षा करने वाले चिकित्सक खुद असुरक्षित हैं। आए दिन चिकित्सकों पर तरह-तरह के हमले होते रहे हैं। चिकित्सक चौबीसों घंटे बड़ी शिद्दत से अपनी सेवा देते हैं लेकिन इनको सुरक्षा मुहैया कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासनिक से लेकर जनप्रतिनिधि तक चिकित्सकों पर रौब झाड़ने से गुरेज नहीं करते लिहाजा चिकित्सक खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में वह अपनी श्रेष्ठ सेवा कैसे दे सकेंगे यह विचारणीय विषय है। उन्होंने मांग किया कि चिकित्सकों को भी सुरक्षा मुहैया कराया जाए ताकि वह खुद को असुरक्षित महसूस ना करें।
डॉ० प्रभा रानी ने कहा कि आए दिन चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं होती ही रहती है। आखिर चिकित्सक कब तक यह सब बर्दाश्त करेंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुरक्षा अधिनियम अवश्य बननी चाहिए ताकि चिकित्सको को सुरक्षा मिल सके।
बीते दिनों रांची, गुमला, लातेहार सहित कई शहरों में चिकित्सकों के साथ बदसलूकी की घटनाएं घटित हुई है जो काफी आहत करने वाली है। उन्होंने कहा कि जब तक मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट नहीं बनाया जाता चिकित्सकों की यह मांग जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आगे राज्य संघ के निर्देशानुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। मौके पर डॉ० एस के चौधरी, डॉ० बनदेवी झा, डॉ० अजय झा, डॉ० तारा शंकर सहित कई चिकित्सक मौजूद थे।





