हेमंत हांसदा
पाकुड़िया रामनवमी के उपलक्ष्य में पाकुड़िया हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय भव्य रामनवमी महोत्सव का उद्घाटन सोमवार रात्रि को आमंत्रित विशिष्ट अतिथि थाना प्रभारी अभिषेक राय,पाकुड़िया पंचायत की मुखिया अनिता सोरेन एवं पंचायत समिति सदस्य गायत्री देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया । इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत कथावाचक गौतम जी महराज ने चादर ओढ़ाकर अपनी आशीर्वचनों से किया । अतिथियों द्वारा महोत्सव का उद्घाटन के बाद तीन दिवसीय संगीतमय भजन एवं प्रवचन का शुभारंभ कथावाचक पंडित गौतम जी महराज ने श्रीगणेश एवं भगवान राम की स्तुति के साथ किया । इस अवसर पर मंच पर विराजमान देवताओं की झांकी की वंदना यजमान विजय भगत एवं उनकी पत्नी अन्नु देवी ने आरती कर किया । रामनवमी महोत्सव अनुष्ठान के प्रथम दिन गौतम जी महराज ने पहले रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मिकी और श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के जीवन वृतांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनो महान आत्मा एक ही अवतार थे । एक अवतार में महर्षि वाल्मीकि ने भगवान श्री राम के जन्म के पहले ही संस्कृत में रामायण की रचना कर दी थी वहीं दूसरे अवतार में गोस्वामी तुलसी दास ने हिंदी में राम चरित मानस की रचना की थी । तुलसीदासजी ने अयोध्या में जब रामचरितमानस लिखना शुरू की थी उस दिन चैत्र मास की रामनवमी दिन मंगलवार वैसा ही योग था, जैसा त्रेता युग में श्री राम जन्म के समय था । रामायण और राम चरित मानस में भगवान विष्णु का मानव रूप रामवतार पर उनके चरित्र पर व्याख्यान किया गया है जो संसार के हर मनुष्य के लिए एक आदर्श है । कथा के एक प्रसंग में राम और रावण के बारे में अंतर पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राम को लोग इसलिए पूजते हैं कि उनके पास चरित्र था जबकि रावण को लोग इसलिए नहीं पूजते हैं कि उनके पास संसार का सभी सुख संपदा और शक्तियां रहते हुए भी उनके पास चरित्र नही था। आज संसार के सभी लोगो को राम के चरित्र को अपनाते हुए अपने जीवन में उनके आदर्श को स्थापित करनी चाहिए । इस अवसर पर भगवान राम के चरित्र को सुनते हुए श्रद्धालुओ ने भाव विभोर होकर भक्ति गंगा में खूब डुबकी लगाई । इस दौरान बीच बीच में गौतम जी महराज ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति कर श्रद्धालुओ को मंत्रमुग्ध कर दिया और भक्तिरस में डूबकर खूब ठुमका लगाने को मजबूर कर दिया ।










