सानू कुमार
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ने के बाद महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव की महिलाओं की तस्वीर बदल गई है, जहां रोजगार के अभाव में महिलाएं व पुरुषों का पलायन और हड़िया बेचने की हालत थी. लेकिन अब महिलाएं बांस से सामग्री बनाकर उसे बेहतर दामों में बेच खुशहाल जिंदगी जी रही हैं. महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव में आजीविका का मुख्य साधन कृषि है. यहां की 90 फीसदी आबादी कृषि पर ही निर्भर करती है थी. वही 10 प्रतिशत लोग सिर्फ मजदूरी पर निर्भर थी. इस वजह से उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, फिर जेएसएलपीएस के सहयोग से महिलाओं ने सखी मंडल का गठन किया. उसके बाद महिला समूह की दीदीयों को बांस से सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. वही जेएसएलपीएस के दीदी पोखरिया गांव निवासी लुखीमुनि टुडू को प्रशिक्षण के बाद फूलों झानो आशीर्वाद अभियान में जुड़ी. इसके बाद सखी दीदी लुखीमुनि टुडू ने हाट बाजार व चौक चौराहों में हड़िया दारू बेचने का काम छोड़कर फूलों झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर उन्हें 25 हजार ब्याज मुक्त ऋण लेकर सुप व डालिया समेत अन्य बांस की सामग्री बनाकर स्वावलंबी बन रही है. साथ ही सखी दीदी के पति भी इस कार्य में सहयोग करते हैं. जहां सुप, डलिया, झाड़ू बनाकर मासिक आय करीब 15 से 18 हजार तक कर रहे है.
वही जेएसएलपीएस के द- एनयूडीजीई के ब्लॉक लीड राजेश कुमार महतो ने जानकारी देते हुए बताया कि जेएसएलपीएस के आर्थिक सहयोग द – एनयूडीजीई
जुड़ने के बाद महिलाएं हड़िया दारू बेचने का कार्य बंद कर सुप डलिया आदि बनाकर अच्छा खासा पैसा कमा रही है. बताया कि सखी दीदी लुखीमुनि टुडू पहले बाजार व चौक चौराहों पर बैठ- बैठकर हड़िया दारू बेचने का काम करती थी. जहां दीदी लुखीमुनि टुडू को लोगों के द्वारा अभद्र भाषाओं का सामना करना पड़ता था. लेकिन जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद दीदी लुखीमुनि टुडू को 25 हजार ऋण दी गई. उन्होंने सुप डलिया बनाकर अच्छी रोजगार कर रही है. वे इस व्यवसाय को बढाना चाहती है. बताया कि सखी दीदी को देखकर और भी महिलाएं इस कार्य से जुड़ रही है. और स्वावलंबी बन कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है. उन्होंने बताया की आज लुखीमुनि टुडू अपनी इस आजीविका से प्रति माह 15 से 18 हजार तक की आय अर्जित कर रही है. पहले की तुलना में अभी उनकी आजीविका काफी बेहतर और स्थिर हो गई है, सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है की उन्होंने हड़िया बेचने का कम छोड़कर समाज में सम्मान के साथ अपनी आजीविका स्थापित की है. उनके इस बदलाव से उनका परिवार भी काफी खुश है. उनके पति भी उनकी आजीविका में सहयोग करते हैं, और वे अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर भी पहले से बेहतर ध्यान दे रही है. इसके अतिरिक्त लुखीमुनि टुडू को मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना का भी लाभ मिल रहा है. जिससे उनके परिवार को अतिरिक्त आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रही है. वहीं लुखीमुनि टुडू अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव का श्रेय जेएसएलपीएस के आर्थिक सहयोग और द- एनयूडीजीई के तकनीकी सहयोग को देती है. वह कहती है कि फूलों झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ने के बाद उन्हें ना केवल एक बेहतर एजीविका मिली बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का आत्मविश्वास भी मिला. लुखीमुनि टुडू की कहानी इस बात की मिसाल है कि यदि महिलाओं को सही समय पर आर्थिक सहयोग कौशल प्रशिक्षण और निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन मिले तो वे मजबूरी की आजीविका को छोड़कर सम्मानजनक टिकाऊ और आत्मनिर्भर आजीविका की और कदम बढ़ा सकती है.





