राजकुमार भगत
पाकुड़। सरकार की तरफ से किसी मंत्री से आश्वासन मिला है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप कर कृषि मंत्री एवं मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे से चेंबर ऑफ चेंबर ऑफ कॉमर्स के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ एक धंटे पचास मिनट वार्ता होने के बाद कृषि कर पर पुनर्विचार व टैक्स नहीं लगाने अर्थात् 0% करने पर सहमति बनी है। चेंबर ऑफ कॉमर्स ने बताया कि विधयेक आने से उनकी भी कुछ मजबूरियां हैं । एफ जे सी सी आई के प्रतिनिधिमण्डल को बताया एवं महसूस किया शुल्क लगने से जनता के ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कृषि मंत्री का बयान आया है की जिसमें उन्होंने कहा है कि वह चेंबर के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ेंगे एवं लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं । आरोप-प्रत्यारोप से सिर्फ और सिर्फ सरकार,व्यापारी,एवं जनता सभी को हानि होती हैं।विकास बाधित होता हैं।
चेंबर कभी भी बंद के पक्ष में नहीं रहता है। चेंबर हमेशा व्यापार खुलवाने का कार्य करता रहा है। मजबूरी में हमें जनहित में आंदोलन खड़ा करना पड़ा । लोगों ने स्वत: ही अपनी दुकानों का किसी प्रकार की परवाह किए बगैर बंद रखा । जो एक सराहनीय कदम हैं। राज्य जागरूक जनता, व्यापारी की पहचान है। , सरकार के सभी मंत्री,सचिव, राज्य के विधायकों, सांसदों, फेडरेशन ऑफ झारखंड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सफल नेतृत्व, सभी एफिलेटेड बॉडी-जिला चेम्बर ऑफ कॉमर्स,पूर्व अध्यक्षों,चेम्बर के सदस्यों, राज्य की सभी संबंध संस्थाएं, राइस मिलर्स एसोसिएशन, खाद्यान्न व्यवसाय संघ, यूनियन संघ कृषक संगठन,फल विक्रेता, सब्जी विक्रेता, मीट, मुर्गा ,मछली,अंडा,खुदरा विक्रेता एवं जनता सभी का सहयोग सराहनीय रहा।
सरकार के आश्वासन के बाद तत्काल झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स आगामी विचार विमर्श होने तक अपनी आंदोलन वापस लेती है। तत्काल पुनः सभी दुकानें खुलेगी।





