राजकुमार भगत
पाकुड़। हिंदी हमारी आन बान और शान है। चाहे सिनेमाघर में देख ले या फिर समाचार में। लोग हिंदी पसंद करते हैं। किंतु हिंदी दिवस पर सरकार या विद्यालय स्तर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन न होना दुखद है। शिक्षक विनोद तीर्थनी सिंधी पड़ा पाकुड़ कहते हैं कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारी पहचान है । हिंदी हम वतन हैं।हमारी शान है । हिंदी को उन्नति की राह पर ले जाना हम सब का कर्तव्य है। हिंदी एक दिन ही नहीं बल्कि नित्य हिंदी दिवस मनाना चाहिए। प्रति वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है । वर्ष 1918 में गांधी जी की अध्यक्षता में हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा गया था। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने का निर्णय दिया गया।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक संसद से सड़कों तक साहित्य से लेकर सिनेमा तक हर जगह का कल बनकर हमारे सामने आती है । हिंदी अपने आप में गौरवमई भाषा है। एक बार अमेरिका में एक अमेरिका ने स्वामी विवेकानंद जी से सवाल पूछा How are you?स्वामी जी स्वामी जी ने कहा मैं अच्छा हूं अमेरिका को लगा शायद स्वामी जी को अंग्रेजी नहीं आती। इसलिए उन्होंने टूटी-फूटी हिंदी में ही सवाल किया आपको भारत से यहां आकर कैसा लग रहा है इस बार स्वामी जी ने अंग्रेजी में कहा I am feeling good in your country and your country is beautiful. अमेरिका ने कहा मैं जब आपसे अंग्रेजी में सवाल किया तो आपने इसका जवाब हिंदी में दिया और जब मैं आपसे हिंदी में सवाल किया तो आपने उसका उत्तर अंग्रेजी में दिया यह क्या पहेली है ।स्वामी जी स्वामी जी मुस्कुराए और उन्होंने कहा जब आपने मुझे अपनी मातृभाषा में सवाल किया तो मैं अपनी मातृभाषा का प्रयोग करते हुए हिंदी में जवाब दिया । आपने फिर मेरी मातृभाषा का सम्मान करते हुए हिंदी में पूछा तो मैं आपकी मातृभाषा का सम्मान करते हुए आप की मातृभाषा में जवाब दिया।अंत में मैं यही कहना चाहता हूं भारत की शान है हिंदी हिंदुस्तानियों के पहचान है हिंदी
आज के आधुनिक युग में अंग्रेजी भाषा भी सीखनी चाहिए यह जरूरी है ।लेकिन हमें मातृभाषा हिंदी को कभी नहीं भूलना चाहिए और सदैव इसका प्रयोग भी हर जगह किया जाना चाहिए।हर कण में बसी है हिंदी,
मेरा मान है हिंदी,मेरी शान है हिंदी।










