13-14 घंटे काम कराने का आरोप, उत्तर दिनाजपुर प्रशासन ने 21 सितंबर को दो वाहनों से भेजने की व्यवस्था की।
पाकुड़। पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी में लगाए गए बच्चों को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने 7 बच्चों को झारखंड के गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज स्थित बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) को हस्तांतरित करने की पुष्टि की है। इनमें पाकुड़ जिले के चार बच्चे शामिल हैं। सभी बच्चों को 21 सितंबर को दो छोटे वाहनों से संबंधित जिलों तक भेजे जाने की व्यवस्था की गई। उत्तर दिनाजपुर के जिला सामाजिक कल्याण पदाधिकारी की ओर से 16 सितंबर को जारी पत्र में रायगंज थाना प्रभारी को बच्चों के स्थानांतरण के लिए पुलिस एस्कॉर्ट टीम की व्यवस्था की सूचना दी गई थी। पत्र के अनुसार सूर्यदया चिल्ड्रेन होम फॉर डेफ एंड डंब बॉयज एंड गर्ल्स, कर्णजोरा, रायगंज से बच्चों को उनके गृह जिले की बाल कल्याण समितियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है।
पाकुड़ के चार बच्चे शामिल
दस्तावेज के अनुसार पाकुड़ के चार नाबालिक बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौंपा जाना है,वही एक नाबालिक बच्चा को गोड्डा तथा दो नाबालिक बच्चे को साहिबगंज भेजा जाना है। पत्र में सूर्यदया चिल्ड्रेन होम के प्रभारी रंजीत दास को एस्कॉर्ट टीम के साथ समन्वय करने तथा बच्चों के साथ संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।
50 बच्चों को बंधुआ मजदूरी में लगाने की सूचना
इस पूरे मामले की शुरुआत झारखंड की चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन की ओर से 23 जुलाई को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) को भेजे गए पत्र से हुई। संस्था ने दावा किया था कि उत्तर दिनाजपुर जिले में करीब 50 बाल एवं किशोर मजदूरों को कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी में लगाया गया है, जिनमें बड़ी संख्या पाकुड़ जिले के बच्चों की बताई गई थी। संस्था के अनुसार बच्चों को कथित रूप से ठेकेदारों द्वारा गांव से बहला-फुसलाकर काम पर ले जाया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बच्चों से सुबह करीब 5 बजे से रात 10 बजे तक, यानी 13 से 14 घंटे तक काम कराया जाता था। गर्म भट्ठियों के आसपास काम कराने और घर लौटने की अनुमति नहीं देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
डीसी कार्यालय ने भी कार्रवाई के लिए लिखा था
चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के पत्र के आधार पर पाकुड़ उपायुक्त कार्यालय की जिला गोपनीय शाखा ने 4 अगस्त को संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर उत्तर दिनाजपुर प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया था। पत्र में बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित पाकुड़ वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। अब उत्तर दिनाजपुर प्रशासन के पत्र से 7 बच्चों के स्थानांतरण की प्रक्रिया सामने आई है। हालांकि, दस्तावेजों में लगाए गए बंधुआ मजदूरी और शोषण संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बच्चों की वापसी के बाद संबंधित बाल कल्याण समितियां उनकी स्थिति, परिवार और पुनर्वास से जुड़े मामलों पर आगे की कार्रवाई करेंगी।








