प्रेणास्रोत
बकरी पालन कर मां ने बेटी को बनाया जीएनएम
सुस्मित तिवारी, हिरणपुर पाकुड़
हौसला, लगन, मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो कोई भी मुश्किल लक्ष्य पाने से रोक नहीं सकती। अपने जीवन को तपस्या बनाकर बेटियों को उनके मुकाम तक पहुंचाने वाली मां के संघर्ष भरी कहानी किसी के लिए भी प्रेरणादायी साबित हो सकती है। पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत खिदिरपुर की तिलका देवी ने ग्रामीण विकास विभाग अंर्तगत पलाश झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा संचालित सखी मंडल का दामन थाम कर बेटी को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया है। पति हराधन मंडल के साथ 42 वर्ष पहले शादी हुई थी। पति मजदूर किसान है खेतो में काम करके व मजदूरी करके किसी तरह अपनी घर की रोजी रोटी चलता था ।आय का कोई दूसरा साधन नहीं था, इसलिए तिलका देवी सखी मंडल की और कदम बढ़ाते हुए पति का सहारा बनी । तिलका देवी सखी मंडल से ऋण लेकर बकरी पालन शुरू की ,बकरी पालन से प्राप्त आय से अपने बेटी की शिक्षा सुचारु रखी , मां की इस संघर्ष से बेटी ने पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े हॉस्पिटल रविंद्र नाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज कोलकाता में जीएनएम के पद प्राप्त कर मां की सपनो को पूरा की। तिलका देवी कहती है ,”बकरी पालन मेरा आर्थिक लड़ाई की साथी है। साथ ही मेरी एटीएम भी है। बकरी पालन मेरी बेटी की पढ़ाई में मेरा आर्थिक लड़ाई का साथी बनी ।जिसके कारण आज मेरी बेटी पश्चिम बंगाल के सबसे बड़ा हॉस्पिटल रविंद्र नाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज कोलकाता में जीएनएम के पद प्राप्त कर मेरे सपनो को पूरा की।
मेरी बेटी की सफलता से मैं गर्व महसूस कर रही हूं।
क्या कहते है अधिकारी
बीरेंद्र कुमार, डीएलएम पाकुड़ ,
तिलका देवी का जीवन संघर्ष व सफलता का मिशाल है । तिलका ने सखी मंडल के सहयोग से ना केवल पति का सहारा बनी ,बल्कि बेटी को कामयाबी की बुलंदी तक पहुंचाई है, ये समाज में अन्य महिलाओं के लिए प्रेणा स्रोत साबित हो सकती है।






