काँग्रेस के ही नही अन्य दलों के कार्यकर्ताओं के लिए भी खुले रहते हैं आलमगीर के दिल और दरवाजे।
भाजपा की इस करनी का हिसाब माँगेगी जनता।
सतनाम सिंह
चुनावी माहौल में झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री सह पाकुड़ विधायक आलमगीर आलम की प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा की गई गिरफ्तारी के असर को भले ही राजनीतिक चश्मे से देखकर उसका राजनीतिक विश्लेषण किया जाए और अपने अपने हिसाब से मीन मेख निकालें जाएँ परंतु क्षेत्र में आलमगीर आलम की छवि और प्रतिष्ठा में कोई कमी दिखती नही प्रतित हो रही । क्षेत्र भ्रमण में अपना जी जान लगा चुके काँग्रेसी कार्यकर्ता से तो बात करके ऐसा ही लग रहा है । दरअसल आज कांग्रेस जिला कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सदर प्रखंड के विभिन्न इलाकों के कार्यकर्ता आए थे जिन्होंने आलमगीर आलम के प्रति अपनी भावनाओं को शब्दों में पेश किया । कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में क्रमशः फरमान अली, रामविलास महतो, कृष्णा यादव, शेजन शेख, जानरूल इस्लाम अंसारी, आली हुसैन व मोहम्मद सिराज जैसे लोगों ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पूर्व मंत्री पर इस तरह की कार्यवाही के पीछे भाजपा की कुत्सित मानसिकता कार्य कर रही है । दरअसल भाजपा व उनके कुनबे के दल इंडिया गठबंधन से इस कदर घबरा गए हैं कि पूरे देश में सामुहिक रूप से इडी, सी बी आई जैसी संस्थाओं का बेजा इस्तेमाल केवल इंडिया गठबंधन के नेताओ के खिलाफ कर रही है, मंत्री आलमगीर आलम की गिरफ्तारी उसी कड़ी का हिस्सा है । प्रखंड स्तरीय नेताओ ने एक सुर में कहा कि आलमगीर आलम पर जो भी आरोप लगाए गए हैं वे सभी आरोप झूठे साबित होंगे और वे बेदाग साबित होकर बाहर आएँगे । दूसरी ओर क्षेत्र के राजनीतिक पंडितों व विशेषज्ञ बताते हैं कि आलमगीर आलम का अपना एक अलग ही अस्तित्व और महत्व है लिहाजा उनको केवल राजनीतिक शख्सियत के तौर पर देखा जाना उचित नही होगा, वे व्यक्तिगत रूप में सरल और मिलनसार हैं । उन्होंने कभी जात पात नही देखा और न ही किसी पार्टी के आए फरियादी को, जो संभव हो सका मदद जरूर की है।उनको जानने वाले और मानने वाले कहते हैं कि भले ही उनके नाम से उनके निजी सचिव या नौकर पैसा उठा रहे हो किंतु इसकी भनक मंत्री को नहीं होना लाजमी है। किंतु रूट लेबल के काँग्रेसी कार्यकर्ता के जोश को देखकर इतना तो तय है कि उनकी गिरफ्तारी से क्षेत्र में प्रचार प्रसार और जोर शोर से होने लगा है । इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के समर्थक आलमगीर आलम की कमी महसूस नहीं होने दे रहे हैं वे पूरी उत्साह और लगन के साथ चुनाव कार्य में लगे हैं।
आलम की फर्श से अर्श तक की यात्रा की संक्षिप्त बानगी
वर्तमान में रहे ईडी के गिरफ्त में ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत इस्लामपुर गांव के रहने वाले हैं। कहते हैं 1978 में उन्होंने राजनीति में अपना कदम रखा और महाराजपुर से सरपंच के चुनाव में अपनी किस्मत अजमाई। वहां से सफल हुए फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर वह कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली। उनके व्यक्तित्व और अच्छे व्यवहार से वर्ष 1995 में वह पहली बार कांग्रेस से टिकट मिला पार्टी से चुनाव लड़े किंतु उन्हें मुंहकी खानी पड़ी। हारने के बावजूद वर्ष 2000 में फिर पार्टी ने अपनी विश्वास जताई और उन्हें विस चुनाव का टिकट दिया और उन्हें जीत हासिल हुई। वर्ष 2005 में भी उन्हें कांग्रेस पार्टी से टिकट दिया गया और वे दूसरी बार भी चुनाव जीत गए।तीसरी बार वर्ष 2009 में वे अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी झामुमो के उम्मीदवार अकिल अख्तर से चुनाव हार गए। किंतु चौथी बार 2014 में पुनः कांग्रेस पार्टी से उन्हें टिकट मिला और भारी बहुमत से जीत दर्ज की व जनता में लोकप्रियता हासिल की।पुनः 2019 में भी अपनी जीत कायम रखी। वर्ष 2000 में अविभाजित बिहार में वे मंत्री पद को सुशोभित किए।20 अक्टूबर 2006 और 12 सितंबर 2009 तक के बीच झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे। उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता भी बनाया गया। किंतु अब वे ईडी द्वारा बरामद 37 करोड़ के विवाद में हैं। उन्हें रीमांड पर रखा गया है। आगे जांच पड़ताल जारी है। वे चाहें तो तत्काल वे अपनी पद से इस्तीफा दे सकते हैं किंतु यह कोई जरूरी नहीं है।उनके चाहने वाले को पूरा भरोसा है कि वे बेदाग साबित होंगे।













