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May 16, 2026 10:52 am

क्षेत्र में हो रहे खामोशी कुछ कहने को अतुर है, जनता का मन समझना कठिन।

राजकुमार भगत

पाकुड़। लोकसभा चुनाव 2024 का समय दिन प्रतिदिन घटते जा रहा है। चुनाव में मात्र शेष 6 दिन रह गए हैं। चुनाव प्रचार के लिए समय भी काम रह गए हैं। इतने बड़े विशाल लोकसभा क्षेत्र में गांव गांव घूमने में किसी भी प्रत्याशी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। जब से लोबिन हेंब्रम, पीपल्स ऑफ़ इंडिया, बहुजन समाज पार्टी, चुनाव मैदान में हैं भाजपा का राह बड़ा आसान हो गया है ।कुल मिलाकर मैदान में 14 उम्मीदवार हैं ।अगर अच्छी ढंग से कैलकुलेट किया जाए तो कौन किसके वोट काट रहे हैं। जीत हार का फैसला इस पर ही निर्भर है। इसलिए सभी पार्टी मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं ।इसलिए सबसे अस्वस्त भाजपा है और वह पूरी तरह से निश्चित है क्योंकि यदि वोटो का बंटवारा होगा तो फिर उन्हें कौन रोकेगा । चार-चार निर्दलीय उम्मीदवार है । कुछ ना कुछ तो लेंगे ।उसके पश्चात कम्युनिस्ट पार्टी, प्रगतिशील, पीपल्स ऑफ़ इंडिया डेमोक्रेटिक, बहुमत समाज पार्टी, ऑल इंडिया, राष्ट्रीय जन संभावना यह सभी ने कुछ ना कुछ बहुमूल्य वोट को अपनी ओर आकर्षित करेंगे और जिसका नतीजा साफ और स्पष्ट है। कभी-कभी देखा जाता है की अंतिम समय में वोटर भी एक हो जाते हैं और किसी एक पार्टी के पक्ष में जमकर वोट डालते हैं।और कभी-कभी ऐसा भी होता है की पार्टी के प्रत्याशी ही अपनी छोड़ दूसरे के पार्टी को वोट देने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं। सभी वोटर एक हो जाते हैं और निश्चित तौर पर किसी एक पार्टी को जिताने की फैसला करते हैं। पाकुड़ जिला की खामोशी कुछ इसी और इंगित कर रही है। यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी राजमहल लोकसभा क्षेत्र से दिगवंत सोम मरांडी कभी मात्र 9 मतों से जीत दर्ज किए थे। इसलिए चुनाव का डगर बड़ा कठिन है। एक-एक रात भारी हो रही है। चुनाव की नैया कैसे पर लगेगी इसकी चिंता हो रही है। रात को नींद नहीं आ रही है देर रात तक जागना और फिर सुबह भागम भाग??
किंतु खामोशी एक वजह है।

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