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March 11, 2026 2:32 pm

जागरूकता रथ से गूंजा संदेश — बाल श्रम नहीं, शिक्षा है अधिकार

बाल श्रम उन्मूलन को लेकर रथ रवाना, उपायुक्त बोले – बच्चों का बचपन बचाना हम सबकी जिम्मेदारी।

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पाकुड़ | बाल श्रम के खिलाफ जंग अब और तेज़ हो गई है। बुधवार को उपायुक्त मनीष कुमार व उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता, विशेष कार्य पदाधिकारी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रथ के माध्यम से जिलेभर में बाल श्रम के खिलाफ जनजागरूकता फैलाई जाएगी। उपायुक्त ने बाल श्रम को राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि– 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के कार्य में लगाना कानूनन अपराध है, वहीं 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को खतरनाक कार्य में नियोजन पर भी रोक है। इसका उल्लंघन करने पर बीस हजार से पचास हजार रुपये तक जुर्माना या छह माह से दो वर्ष तक की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम केवल बच्चों का भविष्य ही नहीं, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकार में धकेलता है। बच्चों को शिक्षा, पोषण और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। यह अभियान सिर्फ सरकार का नहीं, समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी से ही सफल हो सकता है। यह विशेष रथ जिले के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में बताएगा, कानून की जानकारी देगा और समुदाय को जागरूक करेगा कि वे ऐसे मामलों की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। अधिकारियों ने अपील की कि यदि कोई बाल श्रम में लिप्त बच्चा दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।

बचपन को काम से नहीं, किताबों से जोड़ो।

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