बोकारो। राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर पर्यटन सह प्रकृति प्रेमी ललपनिया निवासी अक्षय कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी दिवस आमतौर पर 5 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पक्षियों के प्रति मानव प्रेम को विकसित करना और पक्षियों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है। खासकर राष्ट्रीय पक्षियों—के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम है।

आज पक्षियों पर पड़ रहे खतरों जैसे कि उनका आवास नष्ट होना, अवैध व्यापार, प्रदूषण की मार के बारे में लोगों को सचेत करने के लिए यह दिन एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है किंतु प्रशासनिक विसफलता के कारण इसका सफल आयोजन नहीं हो पता है। यह याद दिलाने के लिए कि पक्षी जैव-विविधता और पर्यावरण संतुलन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं। इसका आयोजन बढ़-चढ़कर किया जाना चाहिए। अगर भारत के संदर्भ में बात करे तो भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है।

भारत में अलग से कोई सरकारी तौर पर घोषित “राष्ट्रीय पक्षी दिवस” नहीं है, लेकिन 5 जनवरी जैसे अवसरों पर मोर सहित सभी पक्षियों के संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं किंतु यह बहुत ही सीमित दायरे में होता है। श्री सिंह ने बताया कि पहले गौरैया चिड़िया हर घर की पहचान हुआ करती थी। गौरैया की मौजूदगी को लोग शुभ मानते थे किंतु आज गौरैया चिड़िया दुर्लभ हो चुकी है।

राष्ट्रीय पक्षी मोर का भी अवैध शिकार होने के कारण उनकी संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली है। अज्ञानता के कारण लोग मोर पंख के लिए मोर का शिकार को बढ़ावा देते हैं। एक ओर भारतीय संस्कृति में पक्षियों को पूजा जाता है तो दूसरी ओर उनके पंख के लिए उसके अवैध शिकार को महामूर्ख लोगों द्वारा बढ़ावा दिया जाता है। कई वन कानून होने के बावजूद भी पक्षियों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। विज्ञान के बढ़ते कदम और शहरों में फ्लैट संस्कृति ने पक्षियों का जीना मुश्किल कर दिया है। पहले जो बच्चे पक्षियों से खेला करते थे आज वे मोबाइल में व्यस्त है। श्री सिंह ने बताया कि गोमिया प्रखंड अंतर्गत झारखंड के सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला में से एक लुगु पर्वत पर हजारों की संख्या में मोर पाए जाते थे जो की कई बार स्थानीय गांव एवं सड़क मार्गों के निकट जंगलों में नजर आ जाते थे किंतु आज इनकी संख्या कम होने के कारण कभी कभार ही सीमित संख्या में नजर आते हैं।






