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April 27, 2026 12:59 am

डीएमफटी फंड पर करोड़ों के दुरुपयोग की आशंका, सामाजिक कार्यकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग की

पाकुड़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ वर्षों में DMFT फंड से संचालित योजनाओं में भारी अनियमितता हुई है, जिससे करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की आशंका बन रही है। अग्रवाल के अनुसार कई योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने कहा कि बिना धरातल पर कार्य कराए ही राशि की निकासी कर ली गई है। इस संबंध में जब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभागों द्वारा स्पष्ट जानकारी देने में टालमटोल किया गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।

पारदर्शिता पर सवाल, वेबसाइट पर नहीं अपडेट डेटा

जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वर्ष 2020 के बाद से DMFT से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट और खर्च का विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है। कई अधिकारी बदले, लेकिन सार्वजनिक जानकारी का अभाव बना रहा।

बोकारो जैसे मामले की आशंका।

अग्रवाल ने बोकारो जिले में सामने आए कथित DMFT घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि वहां सैकड़ों करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बात सामने आई है। उन्होंने आशंका जताई कि पाकुड़ में भी इसी तरह बड़े पैमाने पर अनियमितता हो सकती है।

क्या है DMFT फंड?

जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के लोगों के कल्याण के लिए किया गया है। इसमें खनन कंपनियां अपनी रॉयल्टी का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा जमा करती हैं।

नियमों के अनुसार प्राथमिक उपयोग के क्षेत्र।

DMFT फंड का उपयोग सरकार के दिशा-निर्देशों और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के तहत निम्न प्राथमिक क्षेत्रों में किया जाना अनिवार्य है—

शिक्षा: स्कूल, छात्रवृत्ति, डिजिटल शिक्षा

स्वास्थ्य: अस्पताल, मेडिकल कैंप, पोषण योजनाएं

पेयजल व पोषण: स्वच्छ पेयजल, जल संरक्षण, पोषण कार्यक्रम

कौशल विकास: युवाओं के लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण

उच्च स्तरीय जांच की मांग
सुरेश कुमार अग्रवाल ने मांग की है कि पिछले पांच वर्षों में DMFT फंड के उपयोग की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो। सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाला यह महत्वपूर्ण फंड अपने उद्देश्य से भटक सकता है।

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