महेशपुर (पाकुड़): चौकीदार भीम सोरेन की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिससे इंसानियत पर सवाल उठने लगे हैं। भीम सोरेन की आखिरी इच्छा थी कि उन्हें उनके पुश्तैनी गांव पीपलजोड़ी में दफनाया जाए, लेकिन यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार, पुराने विवाद के कारण भीम सोरेन का परिवार पहले ही पीपलजोड़ी गांव छोड़कर शहरग्राम में रह रहा था। उनके निधन के बाद परिजन जब शव को दफनाने के लिए पीपलजोड़ी पहुंचे, तो गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध कर दिया। विरोध बढ़ने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
आक्रोशित परिजनों और समर्थकों ने विरोध के बाद शव को महेशपुर-शहरग्राम मुख्य सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास शुरू किया। काफी देर तक वार्ता चलती रही। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज है कि क्या किसी व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी अपनी जन्मभूमि में स्थान नहीं मिल सकता।





