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May 20, 2026 11:01 pm

क्लस्टर सिस्टम के खिलाफ एबीवीपी का प्रदेश व्यापी आंदोलन।

केकेएम कॉलेज पाकुड़ में सरकार के खिलाफ फूटा छात्रों का आक्रोश, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री का फूंका पुतला, मांग पूरी न होने पर ‘सड़क से सदन तक’ ईंट से ईंट बजाने की चेतावनी

शिक्षा नहीं बिकने देंगे, झारखंड नहीं झुकने देंगे-एबीवीपी

राजकुमार भगत

पाकुड़: झारखंड सरकार द्वारा थोपे जा रहे छात्र-विरोधी ‘क्लस्टर सिस्टम’ को वापस लेने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होते ही आज पूरे राज्य में आंदोलन का शंखनाद हो गया। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित इस प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत पाकुड़ के K.K.M. कॉलेज में परिषद के कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उग्र प्रदर्शन किया। छात्रों के इस महाआक्रोश के बीच कार्यकर्ताओं ने झारखंड के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का पुतला दहन किया। आंदोलन का नेतृत्व कॉलेज अध्यक्ष दुलाल चंद्र दास ने किया।
इस अवसर पर अभाविप के प्रदेश सह मंत्री बम भोला उपाध्याय ने क्लस्टर सिस्टम की गंभीर कमियों को गिनाते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस आत्मघाती नियम को तुरंत वापस नहीं लिया, तो विद्यार्थी परिषद ‘सड़क से सदन तक’ उग्र आंदोलन चलाएगी और सरकार की ईंट से ईंट बजा देगी। झारखंड के सभी जिला केंद्रों के महाविद्यालयों में हुआ यह अभूतपूर्व आंदोलन सीधे तौर पर जनविरोधी सरकार को अंतिम चेतावनी है। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेश सह मंत्री बम भोला उपाध्याय ने क्लस्टर सिस्टम का संथाल परगना की शिक्षा पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को बिंदुवार रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विषयों के ‘युक्तिकरण’ (Rationalization) के नाम पर चालू कोर्स बंद किए जा रहे हैं, जिससे छात्रों से पढ़ाई के विकल्प छिन जाएंगे। क्रेडिट ट्रांसफर के अव्यावहारिक नियम के कारण परिवहन विहीन इस सुदूर क्षेत्र के गरीब व ग्रामीण छात्र दिनभर एक से दूसरे कॉलेज दौड़ने को मजबूर होंगे, जिससे उनका मानसिक उत्पीड़न होगा और कक्षाएं छूटने से रिजल्ट खराब होंगे। उन्होंने आगे कहा कि B.Ed, BCA और BBA जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को ‘सेल्फ-फाइनेंस’ मोड पर छोड़ना तकनीकी शिक्षा का पूरी तरह व्यवसायीकरण है, जिससे हमारे मेधावी छात्र इससे वंचित हो जाएंगे। नए शिक्षकों की स्थायी बहाली करने के बजाय ‘शिक्षकों का साझा पूल’ बनाना और गैर-शैक्षणिक कार्यों को निजी एजेंसियों को आउटसोर्स करना यह साबित करता है कि सरकार उच्च शिक्षा का गला घोंटना चाहती है, जिसे विद्यार्थी परिषद किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। वहीं, अभाविप के जिला जनजातीय प्रमुख चंदन पहाड़िया ने स्थानीय व क्षेत्रीय भाषाओं को कॉलेजों में मर्ज कर सीमित करने की नीति के खिलाफ जमकर आक्रोश प्रकट किया। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से जनजातियों से उनका जल, जंगल और जमीन तो छीना ही जा रहा था, और अब इस काले कानून के जरिए उनके शिक्षा के अधिकार से भी उन्हें वंचित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। संथाल परगना के जनजातीय छात्र अपनी भाषाई अस्मिता को मिटने नहीं देंगे। उन्होंने साफ किया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस दमन पर चुप बैठने वाली नहीं है; जब तक सरकार इस जनविरोधी क्लस्टर नियम को पूर्णतः वापस नहीं ले लेती, तब तक हमारा यह न्यायसंगत आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
छात्र हितों की इस निर्णायक लड़ाई में अभाविप के कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत झोंक दी। इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन के अवसर पर मुख्य रूप से जिला संयोजक सुमित पांडे, अमड़ापाड़ा के नगर मंत्री विशाल कुमार सिंह, पाकुड़िया के नगर मंत्री रॉकी पाल, कॉलेज अध्यक्ष दुलाल दास, कॉलेज मंत्री रॉकी रविदास, विशाल शाह, अंशिका कुमारी, सोनू सोरेन, विश्वजीत कुमार, राजेश कुमार मंडल, अंजली कुमारी, रागिनी शाह और सोनी कुमारी सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं एवं परिषद के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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