विश्व आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य-संगीत से सजी महफिल; शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता का दिया संदेश
पाकुड़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को धनुषपूजा स्थित झामुमो जिला कार्यालय आदिवासी संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुष कार्यकर्ताओं ने मांदर और नगाड़े की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की मनमोहक झलक पेश की। कार्यक्रम का उद्घाटन झामुमो जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम, जिला उपाध्यक्ष हाजी समद अली और सांसद प्रतिनिधि सह केंद्रीय समिति सदस्य श्याम यादव ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान आदिवासी परंपराओं के अनुरूप सजे कार्यकर्ताओं ने पार्टी पदाधिकारियों का स्वागत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समुदाय की संस्कृति, भाषा, परंपरा, पहचान और अधिकारों के संरक्षण के संकल्प का दिन है। झामुमो जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम ने कहा कि 9 अगस्त को पूरी दुनिया में आदिवासी दिवस मनाया जाता है। पाकुड़ में भी बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुषों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज अपनी संस्कृति और पहचान को लेकर जागरूक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी और पिछड़े समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर ही झारखंड के समग्र विकास की मजबूत नींव रखी जा सकती है। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ-साथ शिक्षा को प्राथमिकता देना समय की जरूरत है। शिक्षा को अधिकार और विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कार्यकर्ताओं से बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षित और जागरूक समाज ही अपने अधिकारों को समझकर राज्य और देश के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष पीटर मरांडी, जिला सचिव माइकल मुर्मू, युवा जिलाध्यक्ष सुनील टुडू, महिला जिलाध्यक्ष जोसेफिना हेम्ब्रम, पूर्व जिला सचिव सुलेमान बास्की, केंद्रीय समिति सदस्य मिथिलेश घोष, महिला मोर्चा जिला सचिव सुशीला देवी, पाकुड़ प्रखंड अध्यक्ष मुसलोद्दीन शेख, लिट्टीपाड़ा प्रखंड अध्यक्ष प्रसाद हांसदा, अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष रेजाउल हक, अजफारुल शेख, लखन हेम्ब्रम, रामसिंह टुडू, अन्ना मुर्मू, सुशीला हेम्ब्रम, ताला मरांडी, पतरास मरांडी, राजेश मुर्मू सहित सैकड़ों महिला-पुरुष कार्यकर्ता मौजूद थे।







