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September 23, 2026 3:40 pm

क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो, राष्ट्रकवि दिनकर जी की इस अनमोल पंक्ति को मेरा नमन- रंजीत कुमार सिंह

अक्षय कुमार

कुजू। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती पर बाल विद्या मंदिर आरा कोलियरी के प्राचार्य रंजीत कुमार सिंह ने जीडी न्यूज़ लाइव से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के महान कवि, लेखक और राष्ट्रवादी चेतना के प्रमुख स्वर थे। श्री सिंह ने आगे कहा कि उन्हें सामान्यतः ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में सम्मानित किया जाता है। इनका पूरा नाम- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ था। इनका जन्म 23 सितंबर 1908 जन्मस्थान- सिमरिया गाँव, बेगूसराय, बिहार मे हुआ था। वहीं इस महान विभूति का निधन 24 अप्रैल 1974 को हुआ था।

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इनकी प्रमुख रचनाएँ जैसे कि काव्य में:-

1.रश्मिरथी — कर्ण के जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित प्रसिद्ध काव्य है। वहीं,
2.कुरुक्षेत्र — महाभारत के युद्ध के माध्यम से युद्ध और शांति पर चिंतन
3.उर्वशी — प्रेम, सौंदर्य और मानवीय चेतना पर केंद्रित कृति रही है। इन्हें कई प्रमुख सम्मानों से भी अलंकृत किया गया। जैसे की:-
1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1959 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उनकी कृति ‘उर्वशी’ के लिए उन्हें 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इनकी कविताओं में स्वाभिमान, स्वतंत्रता, संघर्ष, वीरता और सामाजिक न्याय की भावना प्रमुख दिखाई देती है। स्वतंत्रता आंदोलन और उसके बाद के भारत में उनकी कविताओं ने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’

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