सदर अस्पताल सोनाजोड़ी में विधिक जागरूकता शिविर, मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों को लेकर विशेषज्ञों ने किया जागरूक।
पाकुड़। झालसा रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) पाकुड़ के तत्वावधान में सोमवार को सदर अस्पताल सोनाजोड़ी में मानसिक रोग से ग्रस्त एवं बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष दिवाकर पांडेय के निर्देश और प्रभारी डालसा सचिव विशाल मांझी के मार्गदर्शन में हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. नवीन कुमार संथालिया, डीएस सोहेल अनवर आजमी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार, डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल समेत अन्य चिकित्सकों व पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। सिविल सर्जन डॉ. नवीन कुमार संथालिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन का अभिन्न हिस्सा है। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं मानसिक बीमारी का कारण बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगियों का केवल इलाज ही नहीं, बल्कि बीमारी के मूल कारणों को समझना और पीड़ित से बेहतर संवाद स्थापित करना भी जरूरी है। उन्होंने पहचान, उपचार, पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग, कौशल विकास, शिक्षा के साथ कानूनी और सरकारी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार और डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल ने मानसिक रोग एवं बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता का विशेष प्रावधान है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता का अधिकार है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के तहत भी मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति अपने कानूनी अधिकारों के संरक्षण और उपयोग के लिए मुफ्त कानूनी सेवाएं प्राप्त कर सकता है। डॉ. प्रकाश कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न स्थितियों की जानकारी देते हुए न्यूरोसिस और साइकोसिस के बीच अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि न्यूरोसिस में व्यक्ति को अपनी मानसिक परेशानी का एहसास रहता है, जबकि साइकोसिस में व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क प्रभावित हो सकता है। उन्होंने भ्रम, मतिभ्रम, असामान्य व्यवहार और सोच में बदलाव जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अभिभावकों को बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालने, उनकी तुलना दूसरे बच्चों से नहीं करने तथा पढ़ाई और नौकरी को लेकर लगातार तनाव नहीं देने की सलाह दी। बच्चों की समस्याओं को समझने के लिए उनसे संवाद स्थापित करने और सहयोगात्मक माहौल बनाने पर भी जोर दिया गया। मौके पर सीएस सोहेल अनवर आजमी, डॉ. अमित कुमार, एएमपी डॉ. अजीजुल रहमान, जिला कोऑर्डिनेटर पीएचडी मो. इमरान आलम, इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेडएच विश्वास, सहायक कार्यक्रम समीर खान सहित अस्पताल के कर्मी, सहिया, एनजीओ प्रतिनिधि, डालसा के पैरा लीगल वॉलंटियर्स खुदु राजवंशी, नीरज कुमार राउत समेत अन्य लोग मौजूद थे।







