राजकुमार भगत
पाकुड़। भगवान श्रीहरि विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी इस वर्ष 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12:29 बजे से शुरू होकर रात 11:04 बजे तक रहेगा। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव निशीथ काल में मनाने की परंपरा है। झारखंड के लिए निशीथ काल रात 11:24 बजे से 12:10 बजे तक बताया गया है। इसी अवधि में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन-अभिषेक कर जन्मोत्सव मनाएंगे।
निशीथ काल में होगा विशेष पूजन
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेंगे। दिनभर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, भजन-कीर्तन और गीता पाठ किया जाएगा। मध्यरात्रि में बाल गोपाल का पंचामृत, दूध और जल से अभिषेक कर उन्हें नवीन वस्त्र एवं आभूषण पहनाए जाएंगे। धूप, दीप, चंदन, पुष्प और तुलसी अर्पित करने के बाद माखन-मिश्री, पंचामृत और फल का भोग लगाया जाएगा। आरती और श्रीकृष्ण नाम जाप के साथ जन्मोत्सव संपन्न होगा।
5 सितंबर को होगा व्रत का पारण
अष्टमी तिथि 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहने के कारण जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन किया जाएगा। स्थानीय पंचांग के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद करीब 5:31 बजे पारण का समय बताया गया है। हालांकि तिथि, सूर्योदय और मुहूर्त में स्थानीय अंतर संभव है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए अपने क्षेत्र के प्रमाणित पंचांग अथवा पुरोहित से पूजा और पारण के समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।





