पाकुड़। जिलेभर में शनिवार को जीवित्पुत्रिका यानी जितिया पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर निर्जला उपवास रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रही हैं। दो अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुए तीन दिवसीय पर्व के दूसरे दिन शनिवार को व्रती महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला उपवास रखा। इस दौरान भगवान जीवित्पुत्रिका की पूजा के साथ व्रत कथा का श्रवण किया गया। चील्ह और सियार की पारंपरिक कथा सुनने की भी परंपरा निभाई गई। रविवार को स्नान और पारण के साथ व्रत का विधिवत समापन होगा। पर्व को लेकर जिले के विभिन्न बाजारों में भी रौनक देखने को मिली। महिलाओं ने डाली, फल और पूजा से जुड़ी अन्य सामग्रियों की खरीदारी की। वहीं, आदिवासी समाज में भी जितिया पर्व को लेकर विशेष उत्साह है। विभिन्न स्थानों पर आदिवासी सफाहड़ समाज के श्रद्धालु राम बाबा के घर एकत्रित होकर सामूहिक रूप से पर्व मना रहे हैं। यहां भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर जारी है। श्रद्धालु उपवास रखकर अपनी संतानों की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना कर रहे हैं।








