राजमहल में लगने वाले मेला का इतिहास सात सौ वर्ष से भी पुराना।
साहिबगंज/तालझारी :- झारखंड राज्य के साहिबगंज एक ऐसा जिला है जहां मात्र एक गंगा नदी बहती है जो उत्तरवाहिनी गंगा के तट एवं दक्षिण में पहाड़ियों के बीच बसा राजमहल में माघ माह के पूर्णिमा के दिन उत्तरवाहिनी गंगा नदी पर लगने वाला माघी पूर्णिमा मेला का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व से एक अलग ही पहचान है। इस वर्ष 2023 में आगामी 5 फरवरी को आदिवासी महाकुंभ राजकीय माघी पूर्णिमा मेला में गंगा स्नान होगा। वहीं जानकारों की माने तो राजमहल में लगने वाले मेला का इतिहास सात सौ वर्ष से भी पुराना है। कहा जाता है कि माघ माह के पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टिकोण से काफी महत्व है। इस तिथि को चन्द्रमा माघ नक्षत्र में होता है। इसलिए इसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है। ब्रहम वैवर्ण पुराण के अनुसार माघ माह में भगवान विष्णु का निवास गंगा नदी में होता है। जिसे लेकर इस तिथि को गंगा नदी में स्नान करके लोगों पाप से मुक्त होते है। साथ ही उन लोगों की वांछित मनोकामना पूरी होती है। आदिवासी समुदाय का यह सबसे बड़ा महाकुंभ है। इस तिथि को सनातन धर्म मानने वाले सफाहोड़ आदिवासी एवं विंदिन समाज अपने- अपने धर्म गुरुओं के साथ एक दिन पूर्व ही राजमहल पहुंचने लगते हैं तथा मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थलों अनुमंडल कार्यालय परिसर, बालू प्लांट, रेलवे यार्ड परिसर, सहित अन्य जगहों पर दोनों समाज के लोगों द्वारा पूर्व से ही जगह को चिन्हित एवं घेराबंदी करनी शुरू कर दी जाती है। तथा तिथि में पहुंचकर गंगा स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। वही धर्म गुरुओं की माने तो वे लोग भगवान श्रीराम के अनुयायी हैं। इसलिए कुछ लोग पारंपारिक तीर- धनुष से लैश होकर आते हैं। इनमें यह भी मान्यता है कि जिस प्रकार श्री राम लंका पर विजय पाने के लिए समुद्र तट पर शिव की पूजा किये थे। ठीक उसी प्रकार ये लोग भी एक जाहेर थान बना कर मरांग गुरु अर्थात शिव की पूजा करते हैं। लोगों में यह धारणा है कि माघ पूर्णिमा की तिथि में गंगा मैया से मनोकामना करते हैं। मां गंगा उसे अवश्य पूरा करती है। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु जो गंगा मैया से मांगता है उसे चढ़ावा के रूप में चढ़ाता है। इस अवसर पर भव्य मेले का भी आयोजन किया जाता है जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है जिसे लेकर राजमहल अनुमंडल प्रशासनिक पदाधिकारी एवं जिला स्तर के पदाधिकारी की बैठक भी पूर्ण हो चुकी हैं। तथा स्थल का जायजा भी लिया जा चुका है। वहीं मेले की तैयारी जोरों पर हैं।





