स्कूल की कक्षा के अंदर प्रवेश करने से डरते हैं बच्चे।
अभिभावक स्कूल के जर्जर अवस्था को देखते हुए अपने बच्चों को लेकर है चिंतित।
पाकुड़िया प्राथमिक विद्यालय मड़गांव के बच्चे भय की साए इन दिनों पठन पाठन का कार्य कर रहे हैं । इस विद्यालय की स्थिति इतनी ही जर्जर है कि विद्यालय का छत कब बच्चो एवं शिक्षको के ऊपर टूट कर गिर जाय और बड़ी दुर्घटना घट जाय कहना मुश्किल है । स्थानीय अभिभावकों ने बताया कि विद्यालय लगभग 40 वर्ष पुराना पुराना हो चुका है और अत्यधिक जर्जर हालत में है। विद्यालय में अभी तक शौचालय भी नहीं बना है। विद्यालय भवन में दो कमरो एवं एक बरामदा है । विद्यालय भवन में दीवाल पर चारों तरफ दरार दिखाई पड़ रहा है एवं छत की पपड़ी अपने आप गिरते रहता है। खिड़की दरवाजा सभी टूटा फूटा है। बारिश होने पर छत का पानी क्लास रूम में गिरता है । ग्रामीण भय के माहौल में अपने बच्चों को पठन-पाठन हेतु विद्यालय भेज रहे हैं। विद्यालय में 105 बच्चे नामांकित है और बच्चे को बैठने के लिए सुरक्षित जगह नही है । विद्यालय में बड़ी दुर्घटना घट जाने पर जिम्मेवार कौन होगा । पठन-पाठन हेतु प्रभारी प्रधानाध्यापक के द्वारा बच्चों को बरामदे में ही पढ़ाया जाता है।विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक नकुल कुमार पाल ने बताया कि इस विद्यालय में मेरा प्रभार लिया हुआ लगभग एक वर्ष ही हुआ है। डर लगा रहता है कि विद्यालय कब गिर जाएगा। बच्चों का पठन-पाठन बरामदे में कराया जाता है विद्यालय में रजिस्टर भी नहीं रख पाते हैं । प्रबंध समिति अध्यक्ष दिलीप सोरेन,सचिव नुकुल पाल,मुखिया बिमला बास्की सहित ग्रामीणों ने विद्यालय जर्जर रहने की शिकायत उपायुक्त पाकुड़ एवं प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी से कर संज्ञान लेने की गुहार लगाई है ।










