एक माइनिंग चालान पर हो रहा दो तीन ट्रिप का खेल
सतनाम सिंह
पाकुड़: पाकुड़ में उपायुक्त के सख्ती आदेश के बावजूद बिना माइनिंग चालान के पत्थर लदे ट्रकों का परिवहन इन दिनों जारी है. खैर! सत्ता की हनक के बीच खनन विभाग की संवेदनहीनता की वजह से जिनके पास चालान नहीं है, वैसे गाड़ियां बिना माइनिंग चालान के चेक पोस्ट से पार हो रही है जिसको देखने वाले कोई नहीं है। बताया जा रहा है कि चेकनाका पर बैठे अधिकारी के द्वारा जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। गुप्त सूचना के आधार पर मजिस्ट्रेट एव पत्थर माफियाओं के बिच गहरा संबंध बन चुका है।पत्थर माफिया के द्वारा प्रतिनियुक्त अधिकारी को एक माइनिंग चालान व कुछ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के फोटो लगा कागज के टुकड़ों को हाथ में थमा दिया जाता है। जिससे मजिस्ट्रेट की कमाई भी बढ़ गई है और संभागीय अधिकारियों की भी बल्ले-बल्ले है। बताते चलें कि जिला प्रशासन की सजगता, चुस्ती व फुर्ती के कारण पत्थर उद्योग क्षेत्र में जो भी अवैध कार्य करने वाले थे उन सब पर अंकुश जिला प्रशासन और टास्क फोर्स ने कार्रवाई करते हुए पूर्ण विराम लगा दिया था।लेकिन कहावत है कि तू डाल डाल में पात पात,बस यही कहानी कुछ पत्थर व्यवसाई पर सही साबित होती है,जो वैध का लाइसेंस लेकर भी ज्यादा मोटी कमाई के दूसरे रास्ते खोज लेते है।ऐसा संभव होता है सरकारी महकमे के स्टाफ का साथ देना जिनकी ड्यूटी पत्थर चेक नाका पर लगी होती है जो कुछ ज्यादा कमाने के चक्कर में पत्थर व्यवसाई के जाल में फस कर एक माइनिंग पर कई ट्रिप परिवहन करवाते है।ड्यूटी बदलने पर भी दूसरा साथी साथ देता है इस कार्य में,सबका साथ सबका विकास वाली कहानी गढ़ते है।शहरग्राम के कुछ पत्थर व्यवसाई जिनका पत्थर लदा वाहन शहरग्राम के रास्ते महेशपुर होते हुए राजग्राम पश्चिम बंगाल पहुंचता है।वही हिरणपुर थाना क्षेत्र के कई पत्थर व्यवसाई भी इसी खेल में रोज हाथ आजमा रहे है।इनका भीं पत्थर चिप्स कोटलपोखर के रास्ते नाका पार कर रोज पश्चिम बंगाल को जाता है।कोटालपोखर पारकर बंगाल की सीमा में गाड़ियों के द्वारा माल गिराया जाता है और वही गाड़ी वापस आकर फिर पत्थर ले जाते है। फिर उसी चालान पर दूसरे ट्रिप का खेल चालू हो जाता है यह सिलसिला लगातार ही चल रहा है।





