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May 16, 2026 11:22 am

बच्चे के सुरक्षित जीवन के लिए मीजल्स रूबेला एम आर टीकाकरण जरूरी : डॉ मनीष

राजकुमार भगत

9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को लेना अनिवार्य

पाकुड़।मीजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान की सफलता को लेकर 3 अप्रैल को निजी विद्यालयों की एक विशेष बैठक डी एल ई टी हॉल मैं आयोजन किया गया जिसमें एलाइट पब्लिक स्कूल, संत पॉल स्कूल पाकुरिया, बेथेस्डा मिशन, ओपन स्काई स्कूल, बाल विद्यापीठ, ज्ञान निकेतन, के अलावे जिले भर से 70 विद्यालयों के प्राचार्यों ने भाग लिया।

क्या है मीजल्स रूबेला टीकाकरण

इस संबंध में डब्ल्यूएचओ के डॉ राजीव कुमार उपस्थित सभी प्राचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि रूबेला एवं खसरा एक संक्रामक रोग है तथा यह वायरस के कारण फैलता है। लड़के एवं लड़कियों दोनों में संक्रमित कर सकता है। इसे खसरा रोग भी कह सकते हैं। यह एक जानलेवा बीमारी है ।खसरे के कारण बच्चों में विकलांगता और असमय मृत्यु का भय बना रहता है। इससे प्रभावित व्यक्ति के छींकने या खांसने से भी यह रोग फैलता है ।चेहरे तथा शरीर पर गुलाबी लाल दाने के चकत्ते होना ,अत्यधिक बुखार खांसी, नाक बहना ,आंखें लाल हो जाना खसरे का विशेष लक्षण है ।वही रूबेला के भी लक्षण खसरे जैसे हैं। बच्चों में आमतौर पर रोग हल्का होता है खरीश,कम डिग्री के बुखार , कान के पीछे वह गर्दन में सूजन आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं इसके बचाव बहुत जरूरी है। जो बच्चे जन्म से बहरे है इसके संभावित कारण रूबेला हो सकता है।

बचने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र विकल्प

इस संबंध में जाने-माने चिकित्सक मनीष सीसी सिन्हा बताते हैं कि खसरा रूबेला से बचने के लिए सबसे कारगर उपाय एमआर वन डोज टीकाकरण है। उन्होंने बताया कि खसरा एवं रूबैल्ला कभी-कभी जानलेवा बन जाता है। इससे बचने के लिए खसरा रूबेला एम आर का टीका लगाना नितांत आवश्यक है। 9 माह से 15 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को यह टीका लगाया जाना है। चाहे बच्चे पहले भी एम आर का टीका लगा लिया हो तो भी टीका लगाना जरूरी है। इससे कोई हर्ज नहीं है। टीका बिल्कुल सैफ है इसमें कहीं कोई डरने वाली बात नहीं है। उन्होंने कहा कि निकटवर्ती कई गांव मुल्लों में इसका प्रभाव देखा जा रहा है। यह टीकाकरण अभियान सभी सरकारी, निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष रुप से 12 अप्रैल से 23 अप्रैल तक सुनिश्चित तिथि को लगाया जाएगा ।अभिभावक को चाहिए की सजग होकर अपने घर के सभी 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को यह टीका अवश्य लगवाएं। जिससे बच्चों में यह रोग होने का खतरा नहीं के बराबर है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

किया कहते हैं पाकुर सीएस

असैनिक शल्य चिकित्सा सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सीएस ने उपस्थित सभी प्राचार्यों से अनुरोध किया कि सरकार की महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है इसमें सभी का सहयोग आवश्यक है अगले वर्ष 91% तक यह टीका लगाया गया था इस वर्ष 95% तक टीका लगाया जाना है। इसके लिए सभी स्कूलों में विशेष व्यवस्था की जाएगी। निशुल्क दी जाने वाली दवा बहुत कारगर है। अभिभावकों के साथ मीटिंग करते हुए सभी बच्चों को टीका लगाना सुनिश्चित करें।

डॉ मनीष कुमार ने इस संबंध में विस्तार से घंटों सभी शिक्षकों के उत्तर दिए एवं समझाया। उन्होंने कहा किसी भी विषम परिस्थिति के लिए हम सभी चिकित्सक बिल्कुल तैयार खड़े हैं। ऐसे टीका लगाने का कोई साइड इफेक्ट या किसी भी प्रकार का कोई गड़बड़ी नहीं होती है। एक बिल्कुल सुरक्षित दवा है और 9 वर्ष के आयु से लेकर वर्ग 10 तक के बच्चों को दी जानी है।
बैठक में मुख्य रूप से जिला शिक्षा अधीक्षक, सिविल सर्जन पाकुर ,डॉ मनीष कुमार, डब्ल्यू एच ओ के डॉ राजीव कुमार, जिले के लगभग 70 विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित थे।

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