राजकुमार भगत
पाकुड़। शारदीय नवरात्रि की महानवमी की तिथि 22 अक्टूबर के शाम 7:58 से शुरू हो गई है, जिसका समापन 23 अक्टूबर के शाम 5: 44 पर होगी। उदिया तिथि के आधार पर 23 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। नवरात्रि में माता के नौवे दिन देवी दुर्गा के नवे स्वरूप सिद्ध रात्रि उपासना और आराधना विधि विधान के साथ की जाती है ।नवरात्रि पर्व की अष्टमी और नवमी तिथि की विशेष महत्व होता है। इन दोनों तिथियां में विशेष कन्या पूजन का महत्व है। कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं । धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के नवमी तिथि को मां सिद्ध रात्रि की विधिवत पूजा करने से धर्म बाल यश के साथ-साथ सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:27 से 7:51 मिनट तक एवं दोपहर 1:30 से 2:55 तक है।
महानवमी की तिथि नवरात्रि की आखिरी दिन होती है ।इस दिन मां दुर्गा की सीधी रात्रि स्वरूप की पूजा अर्चना और पाठ करने का महत्व है ।महानवमी तिथि की सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत की पूजा का संकल्प लेना चाहिए । देवी सिद्ध रात्रि की प्रतिमा स्थापित करें एवं भगवान गणेश की पूजा नवग्रह की पूजा सिद्ध रात्रि की पूजा धूप दीप फल फूल एवं निवेदन से करनी चाहिए। सप्तशती की पाठ करनी चाहिए ।दुर्गा सिद्ध रात्रि से जुड़े मित्रों का पाठ करना चाहिए एवं कुमारी कन्याओं का पूजन का विधान है । पूजन के पश्चात उन्हें भोजन एवं उपहार दिया जाता है।





