अधूरे कामों के बीच नए टेंडर और एक ही संवेदक को दोबारा काम देने पर सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल।
पाकुड़। सरकारी योजनाओं में जनता की गाढ़ी कमाई के इस्तेमाल को लेकर पाकुड़ में सवाल खड़े हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने 14वें एवं 15वें वित्त, मनरेगा, जिला परिषद, प्रखंड विकास कार्यालय और विशेष प्रमंडल से संचालित योजनाओं में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पेयजल, चापाकल, कुआं, जलापूर्ति, नाली, जल निकासी, सड़क, गली, फुटपाथ, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग अथवा बंदरबांट की आशंका है। सुरेश अग्रवाल ने कनीय अभियंता सुमन कुमार से संबंधित योजनाओं की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित योजनाओं की मापी पुस्तिका (MB), प्राक्कलन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश और भुगतान अभिलेख की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
विशेष प्रमंडल कार्यालय की डीएमएफटी मद की योजनाओं को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ बोरिंग कार्य अधूरे रहने के बावजूद नए सिरे से करोड़ों रुपये के टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई। साथ ही पूर्व में काम करने वाले उसी संवेदक को दोबारा बड़े कार्य दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने सवाल उठाया कि जब पुराना काम पूरा नहीं हुआ तो नया टेंडर किस आधार पर निकला? कार्य की गुणवत्ता और उपयोगिता का सत्यापन किसने किया? दोबारा काम देने में नियमों का पालन हुआ या नहीं? इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है। उन्होंने संबंधित कनीय अभियंता की सेवा अवधि में आय के ज्ञात स्रोतों और संपत्ति का सक्षम जांच एजेंसी से सत्यापन कराने की भी मांग की है। साथ ही DMFT समेत सभी विवादित योजनाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग जिला प्रशासन एवं उच्चाधिकारियों से की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों या संवेदकों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।





