सुदीप कुमार त्रिवेदी
झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने 1,28,900 करोड़ रुपये का वर्ष 2024-25 का बजट सदन पटल पर रखा। सरकार के बजट यह बजट कमज़ोर नेतृत्व, असमर्थ-असक्षम सरकार का आईना है। इस बजट से झारखंड को बहुत उम्मीद थी लेकिन आज जन-उत्थान और विकास की रूपरेखा निर्धारित करने में यह सरकार विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस दिशाहीन व निराशाजनक बजट से पूरे राज्य को निराशा हुई है, लुभावने घोषणाओं के मायाजाल व निष्क्रिय क्रियान्वयन से योजनाएं विफल साबित हो रही हैं।यह बजट अदूरदर्शी सोच वाला विकास विरोधी बजट है। यह बजट राज्य के खजाने को केवल लुटने और लुटवाने वाला है। इसमें कोई दूरगामी सोच वाला लोक कल्याणकारी योजनाओं का समावेश नही है। केवल लूट खसोट की योजनाओं का कॉपी पेस्ट करते हुए ऑफिसर्स के लिए लूट के रास्ते को खुला रखा गया है। राज्य के किसानों को ठगबंधन सरकार ने 4वर्ष पूर्व ही 2लाख तक के ऋण माफी की बात कही थी लेकिन सब खाली गया। युवाओं के बेरोजगारी भत्ता का भी वादा पूरी तरह विफल साबित हुआ। उल्टे इस सरकार ने भाजपा सरकार की योजनाओं को बंद कर किसानों के साथ अन्याय किया। किसान अपने धान के बकाए के लिए भी चक्कर लगा रहे। बिचौलिए से बेचने के लिए विवश हुए।




