दो महीने पहले शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, पूर्व वार्ड पार्षद बोले— अब चुप नहीं बैठेंगे, करेंगे आंदोलन
अगर जल्द निरस्त नहीं हुए अवैध प्रमाण पत्र, तो अंचल कार्यालय के घेराव के साथ कोर्ट की शरण में जाएंगे जनप्रतिनिधि
पाकुड़: नियमों को ताक पर रखकर और जाली दस्तावेजों के सहारे अवैध जाति प्रमाण पत्र जारी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में पाकुड़ के अंचल अधिकारी (CO) अरविंद कुमार बेदिया और अंचल कर्मचारी राकेश भगत पर मिलीभगत और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर पाकुड़ नगर परिषद के पूर्व वार्ड पार्षद (वार्ड नं. 05) समेत कई वर्तमान व पूर्व वार्ड कमिश्नरों ने उपायुक्त (डीसी) को एक कड़ा स्मरण पत्र सौंपकर त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
सौंपे गए आवेदन के अनुसार, अंचल कार्यालय पाकुड़ के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर दो व्यक्तियों— विमल चंद्र राउत और कृष्णा शर्मा के पक्ष में अवैध रूप से जाति प्रमाण पत्र निर्गत किए हैं। आरोप है कि यह प्रमाण पत्र पूरी तरह से जाली दस्तावेजों के आधार पर और झारखंड सरकार के पत्रांक संख्या 14/जा.नि. 03-13/2015/का. सं. 1754 (दिनांक 25/02/2019) की कंडिका 10, 13 और 15 के सरेआम उल्लंघन करते हुए जारी किए गए हैं।
दो महीने बाद भी कार्रवाई शून्य, दोषियों के हौसले बुलंद
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इससे पहले 6 मई 2026 को भी उपायुक्त कार्यालय को लिखित आवेदन देकर इस पूरे फर्जीवाड़े से अवगत कराया गया था। लेकिन अत्यंत संवेदनशील और धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले पर दो महीने बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कार्रवाई न होने की वजह से दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं।
मांगें नहीं सुनी गई तो आंदोलन की दी चेतावनी
उपायुक्त को सौंपे गए पत्र में मुख्य रूप से दो मांगें की गई हैं जिनमें नियम विरुद्ध और जाली दस्तावेजों पर जारी किए गए दोनों जाति प्रमाण पत्रों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए व फर्जीवाड़े में संलिप्त अंचल अधिकारी (CO) अरविंद कुमार बेदिया और कर्मचारी राकेश भगत पर अविलंब कानूनी मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए मांगे शामिल हैं।शिकायतकर्ता व पूर्व वार्ड पार्षद सीमा सोनी भगत ने बताया कि अगर इस बार भी प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं, तो हम अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अंचल अधिकारी के खिलाफ उग्र धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। साथ ही इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत (क्रिमिनल वाद) का दरवाजा खटखटाएंगे।इस स्मरण पत्र में वार्ड नंबर 12, 11, 8 समेत कई अन्य वार्डों के कमिश्नरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर और मुहर शामिल हैं, जो इस मामले को लेकर अंचल प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत पर उपायुक्त कार्यालय क्या एक्शन लेता है।
अंचल अधिकारी का पक्ष
इस मामले में पूछे जाने पर पाकुड़ के अंचल अधिकारी अरविंद कुमार बेदिया ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित दोनों व्यक्तियों को नोटिस जारी कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि संबंधित व्यक्तियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।







