हाल हिरणपुर लिट्टीपाड़ा मुख्य सड़क में उत्पन्न होने वाली जाम की और दुर्घटना को आमंत्रण देते परिचालन की
उक्त जाम को लेकर जिला के अधिकारी हो या फिर जनप्रतिनिधि है मौन व्रत लिए।
जाम को लेकर पाकुड नगर का हाल बेहाल, नगर प्रशासक चुपचाप।
सुस्मित तिवारी
हिरणपुर (पाकुड़ )आखिर क्यों नहीं थमती है,कोयला डंपर का परिचालन पाकुड़- लिट्टीपाड़ा मुख्य सड़क पर यह सवाल आम लोगों की जेहेन में शासन प्रशासन के प्रति विश्वास को खोते जा रहे है, इसे प्रशासन और जनप्रतिनिधि की लाचारी का है या मजबूरी ,परंतु वास्तविकता यह है कि इन दोनों में से कुछ भी नहीं है, है तो इच्छा शक्ति की कमी या फिर जो आम पब्लिक वही समझती है, कहती है वही सत्य है। अगर वह सत्य है तो यही कारण है की जिले भर में सुनने वाला स्थानीय पदाधिकारी है और ना ही यहां के जनप्रतिनिधि तो फिर बीजीआर कंपनी की बात ही कुछ अलग है, यही कारण है कि स्थानीय तो दूर जिला के अधिकारी से लेकर जन प्रतिनिधि तक इस मामले में खानापूर्ति के अलावा मौन व्रत धारण करिए हुए हैं, आश्चर्य इस बात का है कि करोड़ लागत खर्च कर कोयला डंपर के लिए एक निश्चित मार्ग तय किया गया है ,लेकिन टिप लगाने के चक्कर में आम लोगों के सुविधा- सुविधा, समस्या तो दूर जान को गाजर -मूली तो समझते ही हैं प्रतिदिन भर में 8 से 10 बार सड़क जाम में फंसकर रोज मर्रा की जिंदगी सड़कों से आर- पार कर गुजरने वालों की लाचारी ही समझे कि इसे अब अपना धीरे-धीरे नियति ही मानते चले जा रहे हैं। जाम की समस्या को अपना नियति माने भी तो क्यों नहीं जब समस्या को पुरजोर तरीका से कभी शांति समिति तो कभी अन्य बैठकों में जनता के द्वारा बार-बार उठाए जाने पर खाना पूर्ति के लिए कई दिन तो थम जाता है पुनः दिन दूनी रात चौगुनी के रफ्तार से पुण: कोयला गाड़ी सबको मुंह काला करते हुए सरपट चली जाती है। हालांकि हिरणपुर थाना के नए थाना प्रभारी नविन कुमार के आने से चौक में फोटो ऑटो की समस्या पर तो नजर रखते हैं जिससे कुछ तो राहत मिली है, परंतु जाम कोयला डंपर, के अलावे अन्य भारी वाहनों के कारण बदस्तूर जारी है, क्योंकि कोयला डंपरों की लंबी कतार के आगे छोटी बहन यहां तक की मोटरसाइकिल जाम के आगे नतमस्तक तो है ही आम नागरिक तो अपना नियति ही मान चुके हैं अब।







