मनरेगा योजना की लूट खसोट में मुखिया पति का है खुल कर समर्थन, विभाग भी बिचौलियों के सामने टेक रहे हैं घुटना
बिना काम किए हो जाता कई योजना फाइनल।
मनरेगा योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल हैं. लेकिन पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत असकंधा पंचायत में मनरेगा योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। और ऐसा हो भी क्यों ना पंचायत के जहां मिल जाए चार यार तो सरकार की योजनाओं को खाओ यार की तर्ज पर सरकार के पैसों को गटक जाते हैं. इस पंचायत में संबंधित विभाग, मुखिया, चौरसिया और बिचौलिया की साठगांठ इतनी तेज है कि आलाधिकारी भी यदि जांच में चली जाय तो लक्ष्मी का चढ़ावा कर निकल जाते हैं. बताते चलें कि किसानों के हित में सरकार में सिंचाई व्यवस्था के लिए कई मनरेगा योजना के तहत चल रही है. जिसमें कूप निर्माण भी है. आसकंधा पंचायत के बोरियो, बलरामपुर और भी कई गांव है. जहां कूप निर्माण में खुल्लम खुल्ला भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है. कई सिंचाई कुप ऐसे हैं जिनकी गहराई मात्र 12 से 19 फुट में पूरी कर दी गई. 10 इंच ईट्टा की जोड़ाई की जगह की 5 इंच ईट्टा की जोड़ाई की गई और ऊपर से बीडीओ साहब, लोकपाल हो या पत्रकार सभी के आंखों में धूल फांकने के लिए 10 इंच ईट्टा की जोड़ाई कर दी गई है. जिसमे मनरेगा कर्मी, जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर, विभाग का खुल्ला समर्थन है.।जिससे योजना में मंडल, भगत और चौरसिया ग्रुपों की मनोबल आसमान छूते हुए सभी चांदी काट रहे हैं. मजे की बात तो यह है कि योजना की राशि मिलबांट कर खाने को लेकर कई कूप की गहराई 12 फिट है, तो कुछ की 18 फिट पानी डाल योजना को पूर्ण कर दिया गया है। मुखिया और जेई के द्वारा सिंचाई कूप का पैरापिड भी कंप्लीट नहीं है और बेंड भी नहीं दिया गया है. आसकंधा पंचायत के कई गांव ऐसे है. जहां मनरेगा की योजना दम तोडती नजर आ जाएगी. सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना इस योजना से ग्रामीणों को रोजगार मिलता है. किसानों के हित के लिए सिंचाई की व्यवस्था की जाती है, लेकिन इसी योजना का लाभ विभाग और बिचौलिया खुलकर लूट मचा रखी है. इनके मंसूबे तब सफल हो जाते हैं, जब ग्रामीणों की उम्मीद कहे जाने वाले मुखिया भ्रष्टाचार के लिए खुल कर साथ देते है.
उप मुखिया से मुखिया का पावर मिलने के बाद मंडल की बोल रही है तूती
ज्ञात हो कि इस पंचायत में बिगत कुछ वर्षों से उलटपुलट को लेकर मंडल, भगत और चौरसिया ग्रुप पिछले मुखिया के खिलाफ अच्छा खासा गेम कर पिछले मुखिया की शक्तियां छीनी गई थी. उसके बाद उप मुखिया असकंधा को मुखिया का पावर मिला. फिर उप मुखिया के पति का पंचायत में तूती बोलने लगी. वे योजना को ऐसे पास करवाकर अधिकारियों के आखों में धूल झोंक कर कार्य कराते है, मानो वो उप मुखिया का पति नहीं मनरेगा आयुक्त ही है.
योजना के खिलाफ शिकायत करने पर मंडल, भगत और चौरसिया ग्रुप दिखाते हैं अपना बल
आपको बताते चले कि बीते वर्ष को इस पंचायत की भ्रष्टाचार की पोल एक पार्टी के कद्दावर नेता आसमान छू रहे लूट खसोट देख कई जगहों पर लिखित शिकायत की थी. वही इस मंडल, भगत और चौरसिया ग्रुप ने एक सुनसान जगह में बुलाकर उनके साथ हाथापाई करते हुए उल्टे केस में फंसा देने का धमकी देते हुए आखिर कोर्ट तक पहुँच ही गई. आप अंदाजा लगा सकते हैं, यहां ना ही नेता ओर ना ही विभाग इस पंचायत की ओर आंख उठाकर भी देखे तो कैसे देखें. हालांकि मामला जो भी हो डीसी साहब सहित आलाधिकारी कब इस पंचायत में योजनाओं की जांच कर कार्यवाई करती है, यह देखना है.







