पाकुड़। जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थापित कर्मियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर विभागीय स्तर से जुड़े कुछ कर्मचारी ने बताया कि कई कर्मी लंबे समय से जिले में ही जमे हुए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कर्मियों की पदस्थापना अवधि, तबादला आदेश, कार्य आवंटन और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत के अनुसार शिक्षा,जिला निर्वाचन, नजारत, परिवहन, आपूर्ति, स्थापना, भू-अर्जन, आईटीडीए और अनुमंडल न्यायालय समेत कई कार्यालयों में कुछ लिपिकीय कर्मी छह से दस वर्षों तक एक ही कार्यालय अथवा शाखा में कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्थानांतरण और पदस्थापना से जुड़े नियमों के बावजूद कर्मियों को लंबे समय तक एक ही जगह बनाए रखने का आधार क्या है।
शिक्षा विभाग में तबादले के नाम पर सिर्फ स्कूल बदलने का आरोप
सबसे गंभीर सवाल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाया गया है। नाम न छापने की शर्त पर विभाग से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि जिले में कुछ शिक्षक वर्षों से एक ही प्रखंड में जमे हुए हैं। आरोप है कि तबादले की प्रक्रिया कई मामलों में महज कागजी कवायद बनकर रह जाती है। एक ही प्रखंड में एक स्कूल से दूसरे स्कूल में स्थानांतरण कर दिया जाता है, लेकिन एक प्रखंड से दूसरे प्रखंड में स्थानांतरण क्यों नहीं किया जाता, यह सवाल लगातार उठ रहा है। कर्मचारी के मुताबिक पाकुड़ सदर प्रखंड क्षेत्र में कुछ महिला शिक्षिकाएं करीब 10 से 12 वर्षों से अलग-अलग विद्यालयों में कार्यरत बताई जाती हैं। कभी एक स्कूल तो कभी दूसरे स्कूल में पदस्थापना होने के बावजूद उनका कार्यक्षेत्र लंबे समय से पाकुड़ सदर तक ही सीमित रहने का आरोप है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘कुछ खास के लिए साहब भी खास बन जाते हैं’
विभागीय कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि लंबे समय से एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर अंदरखाने एक अलग व्यवस्था चलने की चर्चा है। उनका कहना है कि “कुछ खास के लिए साहब भी खास बन जाते हैं और टेबल पर बैठकर सारी बातचीत फिक्स हो जाती है।” इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि स्थानांतरण वास्तव में प्रशासनिक जरूरत और नियमों के आधार पर किए जाते हैं तो इसकी प्रक्रिया सभी के लिए समान होनी चाहिए। लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना से लेकर बार-बार उसी क्षेत्र में समायोजन तक के मामलों की समीक्षा जरूरी है।
रात्रि प्रहरी से कंप्यूटर ऑपरेटर का काम लेने पर भी सवाल
मामले में आयुष विभाग के एक रात्रि प्रहरी का मामला भी उठाया गया है। सूत्रों से प्राप्त खबर के अनुसार शिकायत में दावा किया गया है कि उक्त कर्मी लंबे समय से उपायुक्त कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य कर रहा है। ऐसे में उसके मूल पद, वर्तमान दायित्व और वहां कार्य करने के लिए जारी आदेश की जांच की मांग की गई है। सवाल यह है कि पद के अनुरूप दायित्व से अलग कार्य किस आदेश और नियम के तहत लिया जा रहा है।
नजारत के उपकरणों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग
सूत्रों से प्राप्त खबर के अनुसार शिकायत में जिला नजारत कार्यालय से जुड़े सरकारी संसाधनों के उपयोग और रखरखाव का मुद्दा भी उठाया गया है। कोल कंपनी के मद से उपलब्ध कराए गए लैपटॉप, डेस्कटॉप, प्रिंटर, इन्वर्टर समेत अन्य उपकरणों का वर्तमान में कहां और किसके द्वारा उपयोग किया जा रहा है, इसका भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही स्टॉक रजिस्टर, निर्गमन पंजी और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कराने की बात कही गई है।
निष्पक्ष जांच हुई तो खुल सकता है वर्षों की पदस्थापना का राज
शिकायतकर्ताओं ने किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने के बजाय दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित विभागों में प्रत्येक कर्मचारी की पदस्थापना अवधि, स्थानांतरण आदेश, कार्य आवंटन, मूल पद और वर्तमान दायित्व का मिलान कराया जाना चाहिए। शिक्षा विभाग में शिक्षकों के प्रखंडवार पदस्थापना रिकॉर्ड की भी समीक्षा होनी चाहिए।
यदि जांच में नियमों की अनदेखी, मनमाने ढंग से कार्य आवंटन या लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को वास्तविक प्रशासनिक व्यवस्था में भी उतारा जा सकेगा।






