पाकुड़ में बारिश के लिए कर रहे प्रार्थना
सतनाम सिंह
पाकुड़: मानसून की बेरुखी से किसान चिन्तित हैं। उनकी चिन्ता लाजिमी है। समय से वर्षा नहीं हुई तो धान की रोपनी करनी मुश्किल हो जाएगी। समय पर फसल नहीं लगने से उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित होगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। यह सारी चिन्ता किसानों के जुबान पर है। किसान ने कहा कि जून महीने अंतिम पायदान पर है। अभी तक खेत व तालाब, आहर सुखा पड़ा है।खेत की जुताई नहीं हो पायी है। अभी तक खेती शुरू करने लायक बारिश नहीं हुई है। जिससे खरीफ फसलों की बुआई तो दूर किसानों खेत को तैयारी भी नहीं कर पा रहे हैं।वही मानसून इस बार महेशपुर प्रखंड क्षेत्रों में दगा दे रहा है. चिलचिलाती धूप से लोग परेशान हो रहे तो अन्नदाता के चेहरे पर ओर भी मायूसी देखी जा रही है. प्रखंड क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण इसका सबसे ज्यादा बुरा असर फसलों पर पड़ रहा है. कभी कभार आसमान पर भले ही काले बादल मंडरा रहे हो, पर बिन बरसात के निकलने वाले इन बादलों के कारण धान सहित अन्य फसलों पर संकट के बादल मंडरा गया है. किसान तेज धूप और आसमान को देखकर निराश हो रहे है. कहीं बारिश का नामोनिशान तक नहीं है. किसान इंद्रदेव की पूजा अर्चना करते नजर आ रहे हैं तो कही टोटका भी कर रहे हैं. अगर पिछले सप्ताह में दो-चार दिनों को छोड़ दें तो मौसम काफी तल्ख ही रहा. ऐसे में उमस भरी गर्मी का सितम जारी है. गर्मी से निजात के लिए बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को किसी भी हाल में राहत नहीं मिल रही है. बादलों का डेरा आसमान से गायब है और तेज गर्मी व उमस ने सभी को बेहाल कर रखा है. आलम यह है कि लोग आने वाले कुछ दिनों में भी सुहाने मौसम को लेकर सशंकित हैं. मानसून आरंभ के बाद भी बिन पानी सब सुखा पड़ा है, कहीं-कहीं मोटर पंप सेट से किसान खेतों में पानी डाल रहे हैं लेकिन तेज धूप के कारण खेतों में पानी नहीं ठहर रहा है. जब तक अच्छी बारिश नहीं होती है, धान की खेती संभव नहीं है.
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र पाकुड़ के मृदा वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि तीन चार दिन के बाद बारिश की संभावना बनी हुई है. बारिश होते ही सभी किसान बिचड़े फेक कर बुआई करने लग जाएंगे. ताकि सही तरीके से फसल हो सकें. साथ ही किसान लेट वेराइटी राजेंद्र मंसूरी और सहभागी का भी विकल्प है जिसे किसान बिचड़ा गिराकर खेती कर सकते हैं.
क्या कहते है किसान:-








