Search

May 12, 2026 5:10 am

मानसून की बेरुखी ने बढ़ायी किसानों की चिंता, धान उत्पादन को लेकर चिंतित हैं अन्नदाता

पाकुड़ में बारिश के लिए कर रहे प्रार्थना

सतनाम सिंह

पाकुड़: मानसून की बेरुखी से किसान चिन्तित हैं। उनकी चिन्ता लाजिमी है। समय से वर्षा नहीं हुई तो धान की रोपनी करनी मुश्किल हो जाएगी। समय पर फसल नहीं लगने से उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित होगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। यह सारी चिन्ता किसानों के जुबान पर है। किसान ने कहा कि जून महीने अंतिम पायदान पर है। अभी तक खेत व तालाब, आहर सुखा पड़ा है।खेत की जुताई नहीं हो पायी है। अभी तक खेती शुरू करने लायक बारिश नहीं हुई है। जिससे खरीफ फसलों की बुआई तो दूर किसानों खेत को तैयारी भी नहीं कर पा रहे हैं।वही मानसून इस बार महेशपुर प्रखंड क्षेत्रों में दगा दे रहा है. चिलचिलाती धूप से लोग परेशान हो रहे तो अन्नदाता के चेहरे पर ओर भी मायूसी देखी जा रही है. प्रखंड क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण इसका सबसे ज्यादा बुरा असर फसलों पर पड़ रहा है. कभी कभार आसमान पर भले ही काले बादल मंडरा रहे हो, पर बिन बरसात के निकलने वाले इन बादलों के कारण धान सहित अन्य फसलों पर संकट के बादल मंडरा गया है. किसान तेज धूप और आसमान को देखकर निराश हो रहे है. कहीं बारिश का नामोनिशान तक नहीं है. किसान इंद्रदेव की पूजा अर्चना करते नजर आ रहे हैं तो कही टोटका भी कर रहे हैं. अगर पिछले सप्ताह में दो-चार दिनों को छोड़ दें तो मौसम काफी तल्ख ही रहा. ऐसे में उमस भरी गर्मी का सितम जारी है. गर्मी से निजात के लिए बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को किसी भी हाल में राहत नहीं मिल रही है. बादलों का डेरा आसमान से गायब है और तेज गर्मी व उमस ने सभी को बेहाल कर रखा है. आलम यह है कि लोग आने वाले कुछ दिनों में भी सुहाने मौसम को लेकर सशंकित हैं. मानसून आरंभ के बाद भी बिन पानी सब सुखा पड़ा है, कहीं-कहीं मोटर पंप सेट से किसान खेतों में पानी डाल रहे हैं लेकिन तेज धूप के कारण खेतों में पानी नहीं ठहर रहा है. जब तक अच्छी बारिश नहीं होती है, धान की खेती संभव नहीं है.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र पाकुड़ के मृदा वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि तीन चार दिन के बाद बारिश की संभावना बनी हुई है. बारिश होते ही सभी किसान बिचड़े फेक कर बुआई करने लग जाएंगे. ताकि सही तरीके से फसल हो सकें. साथ ही किसान लेट वेराइटी राजेंद्र मंसूरी और सहभागी का भी विकल्प है जिसे किसान बिचड़ा गिराकर खेती कर सकते हैं.

क्या कहते है किसान:-

img 20240623 wa00125877895878968472553
किसान आसारी शेख ने कहा कि अगर कुछ दिनों के अंदर बारिश नहीं हुई, तो धान के बिचड़े को भी बचाना मुश्किल हो जाएगा. कहा कि जून महीने में बूंदा बूंदी दो दिन बारिश होने से हम किसानों में उम्मीद जगी थी कि अबकी बार उनकी फसल ठीक होगी. लेकिन बारिश नहीं होने से सभी किसान मायूस हो गए.
img 20240628 wa00228427595155506364422
किसान शंकर पाल ने कहा कि अब तक मानसूनी बारिश नहीं होने से हमलोगों ने धान का बिचड़ा नहीं गिराया है. उन्होंने कहा कि अब लेट वेराइटी ही एकमात्र विकल्प रह गया है.
img 20240628 wa00237538927502562053420
किसान दिलीप सोरेन ने कहा कि निर्धारित समय के अनुसार मानसून नहीं आने से हम किसानों में निराशा है. पिछले वर्ष भी यही स्थिति थी
img 20240628 wa00241751939433840327473
किसान अमित मंडल ने कहा कि बारिश नहीं होने से किसान के साथ-साथ लोग भी गर्मी से बहाल है. हम किसानों को तो पंप सेट पर ही हर बार निर्भर रहना पड़ता है. बारिश नहीं होने से बिचड़ा सूखने लगा है

Leave a Comment

लाइव क्रिकेट स्कोर
error: Content is protected !!