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May 10, 2026 8:35 am

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा समेकित कृषि पद्धति से खेती करने की दी गई जानकारी

प्रशांत मंडल

लिट्टीपाड़ा (पाकुड़ )मंगलवार को पंचायत भवन नावाडीह के सभागार में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा समेकित कृषि प्रणाली में किसानों की जरूरतों एवं स्थानीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कृषि के क्षेत्र में ज्यादा आमदनी प्राप्त करने की जानकारियां सहित प्रशिक्षण दी गई।इस प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक डाक्टर संजय कुमार ने किसानों को बताया कि आज किसानों के पास घटती प्रति परिवार सीमित भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों तथा उनकी बढ़ती जरूरतों एवं खर्चों के कारण नयी कृषि-प्रणाली की आवश्यकता है जो कि सीमित संसाधनों के समुचित उपयोग से अधिकाधिक लाभ दे सके और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित भी रखा जा सके और कुपोषण, कम आमदनी एवं समुचित शिक्षा के अभाव से जूझ रहे किसानो को अपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए खेती के कई घटकों जैसे फसल, बागवानी, पशु-पालन, कुक्कट पालन, मत्स्य पालन को एक साथ पूरक रूप से समाहित किया जाए तो कृषक परिवार अपने प्रक्षेत्र के उत्पादन से ही इन सभी समस्याओं से निदान प्राप्त कर सकते हैं।वहीं मृदा वैज्ञानिक डाक्टर विनोद कुमार ने बताया कि समन्वित कृषि प्रणाली प्राकृतिक संसाधनों को बचाये रखते हुए अन्य खेती प्रणालियों से ज्यादा आमदनी प्राप्त करने का जरिया है जिसके तहत लागत कम करने के लिए कृषि के एक घटक के अवशिष्टों का उपयोग दूसरे घटक में निवेष के रुप में किया जाता है। समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने से आमदनी में 5-10 गुणा तक बढ़ोतरी संभव है क्योंकि एक घटक का बेकार पदार्थ या अविशष्ट दूसरे घटक द्वारा उपयोग कर लागत घटा लिया जाता है। जैसे कि धान के पुआल का उपयोग जानवरों के चारे, पलवार, मशरुम उत्पादन में किया जाता है तथा इन सभी का उपयोग देशी खाद या कम्पोस्ट बनाने में भी किया जाता है। इस तरह से से एक घटक का अवशिष्ट दूसरे घटक के लिए उपादान होता है तथा एक ही पदार्थ का उपयोग विभिन्न रुपों में होने से उसकी उपयोग क्षमता काफी बढ़ जाती है। समन्वित खेती में कार्बनिक खाद व जैविक खादों के उपयोग से रसायनिक खादों के उपयोग में कमी आती है जिससे मिट्टी स्वस्थ रहती है तथा एवं लम्बी अवधि तक कृषि एवं उपज के लिए टिकाऊ रहती है।इस आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रखंड कृषि पदाधिकारी के.सी.दास, प्रवाह एन.जी.ओ के एग्रीकल्चर एक्सपर्ट नीतू सिंह, लाईवलीहूड एक्सपर्ट सद्दाम हुसैन सहित कई ग्राम पंचायतों के किसानों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

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