पाकुड़। वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कर विशेषज्ञों ने सभी वेतनभोगी कर्मचारियों, व्यवसायियों, पेशेवरों, दुकानदारों, ठेकेदारों तथा अन्य करदाताओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल करने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार आईटीआर केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि वित्तीय पहचान का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है। बैंक से होम लोन, वाहन लोन अथवा बिजनेस लोन लेने के दौरान आयकर रिटर्न आय के प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा विदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन, टैक्स रिफंड प्राप्त करने और बड़े वित्तीय लेन-देन में भी इसकी अहम भूमिका होती है। समय पर आईटीआर दाखिल करने से करदाताओं को विलंब शुल्क, ब्याज और अन्य वित्तीय दंड से बचाव मिलता है। साथ ही भविष्य में आयकर विभाग की नोटिस अथवा अनावश्यक कानूनी जटिलताओं की संभावना भी कम हो जाती है। व्यवसाय से जुड़े करदाताओं के लिए हानि (लॉस) को आगामी वर्षों में समायोजित करने हेतु भी समय पर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित और समयबद्ध आईटीआर फाइलिंग से व्यक्ति और व्यवसाय दोनों की वित्तीय विश्वसनीयता मजबूत होती है तथा बैंकिंग और निवेश संबंधी प्रक्रियाएं आसान बनती हैं। आयकर रिटर्न फाइलिंग, टैक्स प्लानिंग, जीएसटी, टीडीएस, अकाउंटिंग एवं अन्य कर संबंधी सेवाओं के लिए अधिवक्ता सूरज तिबरीवाल से संपर्क किया जा सकता है।
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Adv Suraj Tibriwal






