अक्षय कुमार
रांची। झारखंड में JPSC एवं JSSC की नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलनरत छात्र-छात्राओं पर आज हुए पुलिस लाठीचार्ज पर करणी सेना, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण सिंह ने कड़ी आपत्ति एवं विरोध दर्ज कराया है। प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण सिंह ने कहा कि झारखंड के हजारों युवा अपने भविष्य और रोजगार के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। वर्षों की मेहनत, तैयारी और आर्थिक कठिनाइयों के बाद जब छात्र अपनी जायज मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के समक्ष रखते हैं, तब लाठीचार्ज एवं बल प्रयोग समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को सुनने और उनके साथ संवाद स्थापित करने के बजाय बल प्रयोग किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को यह समझना होगा कि ये छात्र किसी के विरोधी नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य हैं।

करणी सेना सरकार से मांग करती है कि—
- आज के लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- लाठीचार्ज में घायल हुए छात्र-छात्राओं को उचित चिकित्सकीय सहायता एवं आवश्यक सहयोग दिया जाए।
- JPSC/JSSC से संबंधित अभ्यर्थियों की सभी जायज मांगों पर तत्काल छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की जाए।
- भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं एवं परीक्षा संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच कराई जाए।
- दोषपूर्ण अथवा विवादित परीक्षाओं के संबंध में छात्रों को स्पष्ट एवं पारदर्शी निर्णय दिया जाए।
- आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं एवं नियुक्तियों का स्पष्ट, समयबद्ध एवं पारदर्शी कैलेंडर जारी किया जाए।
- आंदोलनरत छात्र-छात्राओं के विरुद्ध अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई से बचते हुए उनकी बात लोकतांत्रिक तरीके से सुनी जाए।
प्रवीण सिंह ने कहा कि करणी सेना छात्र-युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं करेगी। सरकार को तत्काल पहल करते हुए आंदोलनरत अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करनी चाहिए और उनकी जायज समस्याओं का सम्मानजनक समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा, “झारखंड के युवाओं के हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए, लाठी नहीं। सरकार छात्रों की आवाज सुने और बल प्रयोग के बजाय संवाद का रास्ता अपनाए।” करणी सेना स्पष्ट करती है कि छात्रहित की हर जायज एवं लोकतांत्रिक मांग के साथ वह मजबूती से खड़ी है। यदि सरकार छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं करती है, तो करणी सेना छात्रहित में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज और मजबूती से उठाएगी।





