लेनदारों के ख़ौफ से सदस्य सचिव कार्यालय आते नहीं
सुदीप कुमार त्रिवेदी
किसी भी देश की सकल घरेलू उत्पाद व अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में कृषि क्षेत्र, जो कि प्राथमिक क्षेत्रक की श्रेणी में आता है, का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहता है ताकि देश की अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक अंशदान करने वाला प्राथमिक क्षेत्रक और इससे जुड़े कृषक वर्ग और मजबूत हो सके । इसी पावन उद्देश्य को भारत व राज्य सरकारों ने समेकित सहकारी विकास परियोजना को वजूद में लाई, लेकिन दूषित व गलत कार्यशैली के कारण उक्त परियोजना अपने उद्देश्य से भटक सी गई । कुछ इसी तरह का मामला सोनाजोड़ी लैंप्स का है । सोनाजोड़ी लैंप्स के कार्यालय में अमूमन ताला लटका रहता है । गत दिनांक 18 मई को भी यही हाल था । इस बाबत सोनाजोड़ी लैंप्स के सदस्य सचिव इकबाल अंसारी से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि लेनदारों के द्वारा अपने पैसे वापस पाने के लिए कार्यालय पहुँच कर बदतमीजी की जाती है, असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग किया जाता है जिसके कारण वे कार्यालय नहीं खोलते है । इकबाल अंसारी ने लेनदारो का समर्थन करते हुए आगे कहा कि उनके द्वारा विभाग को बार बार जानकारी दी जाती है लेकिन विभाग की ओर से कोई सुनवाई नहीं होती है । इस मामले में जिला सहकारिता पदाधिकारी ने संपर्क करने पर बताया कि विभाग ने कार्यवाही करते हुए केस किया है एवं मामला न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए जब तक फैसला नहीं हो जाता है तब तक कुछ कहना उचित नहीं होगा, हालांकि उन्होंने सोनाजोड़ी लैंप्स के बंद रहने के मुद्दे पर कहा कि चुकि अभी चुनाव में सभी व्यस्त हैं लेकिन फिर भी वे आगामी सोमवार को इस मामले की जानकारी निजी स्तर पर लेंगे ।





