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May 25, 2026 8:48 pm

413 गांवों में सरकारी योजनाओं की बरसात, ‘आदि कर्म योगी अभियान’ से 18 हजार से अधिक जनजातीय हुए लाभांवित

आदि प्रसारण पोर्टल’ पर दर्ज हुई पाकुड़ के गांवों की तरक्की, अब बनेगा विलेज प्रोग्रेस कार्ड: अरुण एक्का

पाकुड़: वर्ष 2026 को ‘जनजातीय गरिमा वर्ष’ के रूप में मनाते हुए जिला प्रशासन ने सुदूरवर्ती जनजातीय क्षेत्रों में विकास का नया इतिहास रच दिया है। एकीकृत जनजातीय विकास अभिकरण, पाकुड़ के सौजन्य से “सबसे दूर, सबसे पहले” के संकल्प के साथ संचालित ‘आदि कर्म योगी अभियान’ का सोमवार को विधिवत समापन हो गया। इस महाअभियान की सफलता को लेकर परियोजना निदेशक अरुण कुमार एक्का ने समाहरणालय में प्रेस वार्ता की और सात दिनों की जमीनी प्रगति के आंकड़े साझा किए। इस दौरान जिले के कुल 413 पीएम जनमन और DA-JGUA गांवों में शत-प्रतिशत सैचुरेशन (संतृप्ति) के लक्ष्य के साथ कैंप लगाए गए, जिसमें कुल 18,369 ग्रामीणों ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेकर लाभ उठाया।इस विशेष अभियान का आगाज 18 मई को समाहरणालय सभागार में जिला स्तर के अधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) की एक दिवसीय कार्यशाला के साथ हुआ था। रणनीति के तहत 19 से 25 मई तक सभी लक्षित गांवों में युद्धस्तर पर शिविर और सघन स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। प्रशासन का मुख्य फोकस आदिम जनजाति और पिछड़े जनजातीय परिवारों को सीधे सरकारी योजनाओं के हक से जोड़ना था।अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें दैनिक आधार पर प्रगति की ऑनलाइन ट्रैकिंग ‘आदि प्रसारण पोर्टल’ पर की गई।

ग्राम भ्रमण और जनसुनवाई से थामी सुदूर गांवों की नब्ज

अभियान के दूसरे दिन यानी 20 मई को ‘ग्राम भ्रमण अभियान – ट्रांसेक्ट वॉक’ का आयोजन किया गया। इसके तहत प्रशासनिक अधिकारियों, आदि कर्मयोगियों और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) की टीम ने सुदूर गांवों में पैदल घूमकर ग्रामीणों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का जायजा लिया और योजनाओं की जमीनी हकीकत देखी। इसके बाद 21 से 23 मई तक जिले के सभी ‘आदि सेवा केंद्रों’ (ASKS) पर जनता की शिकायतों के निपटारे और उनके अधिकारों के त्वरित निष्पादन के लिए विशेष सत्र चले। वहीं, 24 मई को विशेष जनसुनवाई के जरिए लंबित मामलों को ऑन-द-स्पॉट निपटाने का काम किया गया।

बनेगा विलेज प्रोग्रेस कार्ड, कमियां होंगी दूर

आईटीडीए के परियोजना निदेशक ने बताया कि अभियान के तहत मुख्य प्रदर्शन संकेतकों (KPI) के आधार पर अब प्रत्येक गांव का ‘प्रोग्रेस रिपोर्ट कार्ड’ तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद यह देखना है कि किस गांव में किस परिवार को अब तक किस योजना का लाभ नहीं मिला है। छूटे हुए मामलों को त्वरित जनसुनवाई के माध्यम से निस्तारित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन की इस मुहिम से पाकुड़ के अत्यंत पिछड़े और सुदूरवर्ती इलाकों के जनजातीय समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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