ललपनिया। बैंक मोड़ स्थित सेंट मैथ्यू स्कूल में कलम के सिपाही “मुंशी प्रेमचंद” की जीवनी पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर विद्यालय के गणित शिक्षक जैनुल आबेदीन में विद्यार्थियों को बताया कि मुंशीप्रेमचंद भारत के महान हिंदी और उर्दू साहित्यकार थे। उन्हें हिंदी साहित्य में “उपन्यास सम्राट” कहा जाता है। उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं, जैसे गरीबी, किसान जीवन, जाति-भेद, महिलाओं की स्थिति और अन्याय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि उनका वास्तविक नाम- धनपत राय श्रीवास्तव था उनके कई उपनाम भी थे जिनमें नवाब राय एवं प्रेमचंद काफी लोकप्रिय थे। उनका जन्म सन् 1880 में 31जुलाई को लमही गाँव, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इनके पिता का नाम मुंशी अजायब लाल व माता का नाम आनंदी देवी था। इनकी पत्नी का नाम शिवरानी देवी था।

मुंशी प्रेमचंद के शिक्षा और कार्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू और फ़ारसी में हुई थी। इन्होंने शिक्षक तथा स्कूल निरीक्षक के रूप में कार्य भी किया था। 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर सरकारी नौकरी छोड़ दी और पूर्णकालिक लेखन शुरू किया। इनकी प्रमुख उपन्यासों में गोदान, गबन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि, सेवासदन व प्रसिद्ध कहानियाँ में ईदगाह, कफन, पंच परमेश्वर, पूस की रात, दो बैलों की कथा, नमक का दरोगा आदि प्रमुख हैं।
चित्र- AI
Related Posts

राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृत उत्थान विषय पर भव्य संगोष्ठी का हुआ आयोजन





