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September 7, 2026 4:55 am

कोयला ढुलाई की सड़क पर ‘तेल का खेल’! ढाबों में कथित चोरी के डीजल की खरीद-बिक्री, जाम से लोग और डंपर मालिक परेशान।

रेलवे साइडिंग तक चल रहा कथित अवैध कारोबार; हादसों के बाद मुआवजे के नाम पर दलाली का भी आरोप, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल।

पाकुड़/अमड़ापाड़ा। अमड़ापाड़ा की कोयला खदानों से पाकुड़ रेलवे साइडिंग तक रोजाना सैकड़ों हाइवा और डंपर कोयला लेकर गुजरते हैं। इसी व्यस्त कोयला परिवहन मार्ग पर सड़क किनारे संचालित कुछ ढाबे इन दिनों कथित रूप से ‘तेल के खेल’ का अड्डा बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ हाइवा चालकों द्वारा वाहनों से कथित तौर पर निकाला गया डीजल इन ढाबों पर खुलेआम खरीदा जाता है। आरोप है कि इस अवैध खरीद-बिक्री के कारण सड़क किनारे वाहनों की कतार लगती है और कई बार घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। सूत्रों का कहना है कि डीजल की कथित कालाबाजारी में चालक, बिचौलिये और कुछ ढाबा संचालक सक्रिय हैं। इससे जहां इस कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक फायदा होने की बात कही जा रही है, वहीं आम राहगीरों के साथ-साथ कोयला परिवहन करने वाले डंपर मालिकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। सवाल यह है कि यदि सड़क किनारे इतनी बड़ी मात्रा में डीजल की खरीद-बिक्री होती है तो संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही?

ढाबा नाम का, कारोबार तेल का?

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सड़क किनारे बने कुछ ढाबों में भोजन-पानी के कारोबार की आड़ में कथित रूप से डीजल की खरीद-बिक्री का खेल चलता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल अवैध कारोबार का मामला है, बल्कि इससे सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

हादसे के बाद सक्रिय हो जाते हैं कथित बिचौलिए

सूत्रों ने कोयला परिवहन मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि किसी हाइवा या डंपर से दुर्घटना होने के बाद कुछ कथित बिचौलिए तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। आरोप है कि कंपनी और पीड़ित पक्ष के बीच समझौते में दलाली कर मोटी रकम वसूलने का प्रयास किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में पीड़ित परिवार को वास्तविक मुआवजे की तुलना में कम राशि देकर पूरी रकम प्राप्त होने संबंधी कागजात पर हस्ताक्षर कराने की बात भी सामने आती रही है। हालांकि, इस तरह के आरोपों की पुष्टि संबंधित कंपनी, पीड़ित परिवार या प्रशासनिक स्तर से नहीं हुई है।

बीमार मवेशियों को सड़क पर छोड़ने का भी आरोप

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ कथित दलाल पहले से बीमार या कमजोर मवेशियों को कोयला परिवहन वाली सड़क पर छोड़ देते हैं। इसके बाद हाइवा से दुर्घटना होने पर मुआवजे के नाम पर कंपनी से रकम वसूलने की कोशिश किए जाने की बात सूत्रों ने कही है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह न केवल संगठित ठगी का मामला हो सकता है, बल्कि जानबूझकर दुर्घटना की स्थिति पैदा कर लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा गंभीर अपराध भी है।

सहारग्राम में ‘दलाली नेटवर्क’ की चर्चा

स्थानीय लोगों के अनुसार, सहारग्राम क्षेत्र में ऐसे कथित बिचौलियों की सक्रियता की चर्चा अक्सर होती रहती है। डीजल की कथित कालाबाजारी से लेकर दुर्घटना के बाद मुआवजा दिलाने के नाम पर होने वाली कथित दलाली तक कई तरह के आरोप स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविकता सामने आ सकती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग के लिए जरूरी है कि कोयला परिवहन मार्ग पर नियमित जांच अभियान चलाकर डीजल की अवैध खरीद-बिक्री, संदिग्ध ढाबों और दुर्घटनाओं के बाद सक्रिय होने वाले कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच करें।

जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क किनारे डीजल की अवैध खरीद-बिक्री और दुर्घटनाओं के बाद कथित दलाली लंबे समय से चल रही है तो निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, चालक, ढाबा संचालक या बिचौलिए की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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