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September 13, 2026 1:40 pm

डीएमएफटी योजनाओं की जांच में देरी पर उठे सवाल, सुरेश अग्रवाल बोले- गठित टीम ने अब तक शुरू नहीं की जांच।

करोड़ों की योजनाओं में गुणवत्ता और भुगतान की जांच की मांग; एमबी, तकनीकी स्वीकृति से लेकर स्थल निरीक्षण तक जांच कराने की मांग।

पाकुड़। जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) मद से ग्रामीण विकास विभाग के विशेष प्रमंडल कार्यालय के माध्यम से कराई गई योजनाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने योजनाओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए सवाल किया कि यदि शिकायत के बाद पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की जा चुकी है, तो अब तक धरातल पर जांच शुरू क्यों नहीं हुई। सुरेश अग्रवाल के अनुसार, CPGRAMS के माध्यम से की गई शिकायत के संबंध में उन्हें दूरभाष पर जांच टीम गठित किए जाने की जानकारी दी गई थी। उनका दावा है कि विशेष सूत्रों से उन्हें जानकारी मिल रही है कि टीम गठन के बावजूद जांच प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि DMFT फंड से जुड़े मामले करोड़ों रुपए की योजनाओं और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से संबंधित हैं, इसलिए जांच में देरी गंभीर सवाल खड़े करती है।

कई योजनाओं की गुणवत्ता और खर्च पर उठाए सवाल

सुरेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि DMFT मद से विशेष प्रमंडल कार्यालय के माध्यम से कराई गई कई योजनाओं में स्वीकृत राशि के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होने की आशंका है। इनमें गार्डवाल, PCC सड़क-सह-नाली, पुलिया, बोल्डर पिचिंग, PCC सह बोल्डर केटिंग, चारदीवारी और पक्की नाली-सह-ढक्कन निर्माण सहित कई कार्य शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ योजनाओं में स्वीकृत राशि के मुकाबले धरातल पर लगभग 40 प्रतिशत लागत के बराबर ही काम होने की आशंका है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद ही सामने आएगी। सुरेश अग्रवाल ने विशेष रूप से कनीय अभियंता सूरज कुमार और अजय कुमार के कार्यकाल में कराई गई योजनाओं की जांच के साथ संबंधित सहायक अभियंताओं और अन्य तकनीकी पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

स्टेडियम से सदर अस्पताल तक कई योजनाओं का दिया उदाहरण

सुरेश अग्रवाल ने कुछ योजनाओं का उल्लेख करते हुए इनके अभिलेख और स्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराने की मांग की। उनके अनुसार सदर अस्पताल और पंचायत शहरकोल में वॉल पैनलिंग के नाम पर क्रमशः करीब 24.60 लाख और 9.95 लाख रुपए की राशि से जुड़े कार्यों का उल्लेख है। रानी ज्योतिर्मयी स्टेडियम परिसर में झंडारोहण के लिए चबूतरा और सीढ़ी निर्माण पर करीब 24.70 लाख रुपए, प्लेटफॉर्म निर्माण पर करीब 7.52 लाख रुपए तथा गैलरी ब्लॉक में गेट और विद्युत कार्य पर करीब 5.69 लाख रुपए के भुगतान का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने इन योजनाओं की मापी पुस्तिका (MB), तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति, कार्यादेश, बिल, भुगतान अभिलेख और स्थल निरीक्षण के आधार पर जांच कराने की मांग की है।

कागजों पर काम दिखाकर भुगतान का भी आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि DMFT की कुछ योजनाओं में कथित तौर पर कागजों पर काम पूरा दिखाकर राशि निकासी किए जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का भौतिक सत्यापन, तकनीकी ऑडिट और वित्तीय ऑडिट होने पर ही आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी।
सुरेश अग्रवाल ने कहा कि DMFT की राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और आम लोगों की सुविधा के लिए है। ऐसे में राशि के उपयोग में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

बोरिंग योजनाओं पर भी उठाए सवाल

सुरेश अग्रवाल ने तत्कालीन उपायुक्त मनीष कुमार के कार्यकाल में DMFT मद से बोरिंग योजनाओं के लिए निकाली गई निविदाओं का भी मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि करोड़ों रुपए की कुछ योजनाएं अब तक पूर्ण नहीं होने की जानकारी मिल रही है, जबकि बाद में दोबारा बोरिंग के लिए राशि निकाले जाने का आरोप है।
उन्होंने पूर्व में प्रधान महालेखाकार (AG), रांची की ऑडिट टिप्पणियों और संबंधित अभिलेखों के आधार पर भी जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि ऑडिट में किसी योजना को लेकर आपत्ति या अपूर्ण कार्य का उल्लेख है तो उस पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

बोले- जांच से आरोप सही या गलत, दोनों स्थिति साफ होगी

सुरेश अग्रवाल ने पिछले तीन वर्षों में विशेष प्रमंडल कार्यालय के माध्यम से DMFT मद से कराई गई सभी योजनाओं की स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्चस्तरीय तकनीकी टीम से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में योजना की स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश, MB, स्थल की स्थिति, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, भुगतान, राशि निकासी, पूर्णता प्रमाण-पत्र, अभियंताओं की भूमिका और ऑडिट आपत्तियों पर हुई कार्रवाई को शामिल किया जाए। अग्रवाल ने कहा, “यदि लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों की जवाबदेही तय हो सकेगी।” उन्होंने गठित जांच टीम से जल्द जांच शुरू कराने और रिपोर्ट संबंधित उच्च अधिकारियों एवं सक्षम प्राधिकार को उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की अंतिम पुष्टि केवल स्वतंत्र जांच और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही हो सकती है।

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