डुमरिया मौजा की 7.38 एकड़ जमीन का मामला, महाकाल रॉकबेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों पर फर्जी हस्ताक्षर से दस्तावेज तैयार कराने का आरोप।
पाकुड़: लिट्टीपाड़ा के ग्रामीण जिनकी कुछ जमीन हिरणपुर प्रखंड के डुमरिया गांव में पड़ती है, उक्त जमीन पर खनन पट्टा हासिल करने के लिए रैयतों की जमीन पर कथित तौर पर जालसाजी किए जाने का मामला सामने आया है। जमीन मालिकों ने महाकाल रॉकबेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आदित्य अग्रवाल एवं विशाल अग्रवाल पर उनकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन से संबंधित दस्तावेज तैयार कर खनन लीज की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर शुक्रवार को डुमरिया गांव के दर्जनों रैयत समाहरणालय पहुंचे और जनसमाधान दिवस में प्रभारी अपर समाहर्ता को उपायुक्त के नाम शिकायत पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। रैयतों ने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि डुमरिया मौजा स्थित खाता संख्या 14 एवं 37 के प्लॉट संख्या 244, 245 पी, 250, 251, 252 एवं 253 डीपी में कुल 7.38 एकड़ जमीन पर खनन पट्टा लेने के लिए कथित रूप से उनकी जानकारी के बिना दस्तावेज जिला खनन कार्यालय में जमा कराए गए हैं। रैयतों का दावा है कि दस्तावेजों में उनके फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया है।
ग्रामसभा के नोटिस से खुला मामला
रैयतों के अनुसार, उन्हें इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी तब हुई, जब हिरणपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से ग्रामसभा को लेकर 16 आना रैयतों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस मिलने के बाद जमीन मालिकों को कथित खनन लीज की प्रक्रिया की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। रैयतों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रस्तावित ग्रामसभा एवं खनन पट्टा से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि खनन लीज के लिए प्रस्तुत कागजात में रैयतों के हस्ताक्षर वास्तविक हैं या फर्जी। शिकायत करने वालों में बेटका मरांडी, मांझी मुर्मू, जोहन मरांडी, छुतार मरांडी समेत डुमरिया गांव के दर्जनों रैयत शामिल हैं। रैयतों ने कहा कि उनकी सहमति के बिना उनकी जमीन पर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि या लीज की प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा रैयतों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।







