579 अंडरपास से सुरक्षित हुआ रेल आवागमन, 99 शेष फाटकों को भी आधुनिक सुरक्षा कवच देने की तैयारी तेज।
रेल यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूर्व रेलवे ने समपार फाटकों को आधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस करने का अभियान तेज कर दिया है। महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में सियालदह, हावड़ा, आसनसोल और मालदा मंडलों में समपार फाटकों के इंटरलॉकिंग के साथ रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) और सीमित ऊंचाई वाले सबवे का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। पूर्व रेलवे के चारों मंडलों में कुल 906 मानवयुक्त समपार फाटक हैं, जिनमें से 807 को इंटरलॉक्ड किया जा चुका है। अब केवल 99 गैर-अंतःसंलग्न फाटक शेष हैं। इंटरलॉकिंग प्रणाली में फाटक के पूरी तरह बंद और सुरक्षित लॉक होने के बाद ही ट्रेन को आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी मिलती है। इससे मानवीय भूल की आशंका कम होती है और ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित बनता है। मंडलवार आंकड़ों के अनुसार, सियालदह मंडल के 379 मानवयुक्त समपार फाटकों में 368 इंटरलॉक्ड हैं, जबकि 11 गैर-अंतःसंलग्न फाटक शेष हैं। हावड़ा मंडल में 301 में से 267, आसनसोल मंडल में 127 में से 93 और मालदा मंडल में 99 में से 79 फाटक इंटरलॉक्ड किए जा चुके हैं। समपार फाटकों को समाप्त करने की दिशा में भी पूर्व रेलवे लगातार काम कर रहा है। अब तक सियालदह मंडल में 119, हावड़ा में 244, आसनसोल में 104 और मालदा मंडल में 112 रोड अंडर ब्रिज एवं सीमित ऊंचाई वाले सबवे का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस प्रकार पूरे पूर्व रेलवे में कुल 579 आरयूबी और सीमित ऊंचाई वाले सबवे तैयार हो चुके हैं। इन अंडरपास के निर्माण से सड़क वाहन, एंबुलेंस और पैदल यात्रियों को रेलवे फाटक बंद होने पर लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता। साथ ही, सक्रिय रेल पटरियों को पार करने की जरूरत भी कम होती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका घटती है। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि यात्री सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च और अटल प्राथमिकता है। समपार फाटकों के आधुनिकीकरण और अंडरपास निर्माण के जरिए रेल यात्रियों, राहगीरों और आम नागरिकों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करने का प्रयास लगातार जारी है।यदि चाहें तो इसे मैं दैनिक जागरण/हिंदुस्तान की शैली में और अधिक प्रभावशाली अखबारी भाषा में भी तैयार कर सकता हूं।








