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May 16, 2026 5:25 pm

अपने ही पार्टी के प्रत्याशी के विरुद्ध खड़े होना लोबिन हेंब्रम को पड़ा भारी

राजकुमार भगत

पाकुड़।लोबिन हेंब्रम को अपने ही पार्टी के प्रत्याशी के विरुद्ध बगावत कर चुनाव लड़ना भारी पड़ गया । उन्हें जिस पर अटूट विश्वास था वे हैं पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता गुरु जी शिबू सोरेन। उन्होंने राजमहल सांसद सह झारखंड मूर्ति मोर्चा के प्रत्याशी विजय कुमार हंसदा के विरुद्ध पार्टी में रहते हुए नियम विरुद्ध अपने ही पार्टी से बगावत कर स्वतः निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल किया है ।जिनका चुनाव चिन्ह कैंची है। लोबिन हेंब्रम को इसका दोषी पाकर पार्टी सुप्रीमो ने इन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी निष्कासित कर दिया है। जिसमें कहा गया है की लोकसभा चुनाव के लिए अपने ही पार्टी के प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ने एवं कार्यकर्ताओं को दिगभ्रमित कर पार्टी की छवि को धूमिल करने का आरोप है।
मालूम हो कि लोबिन हेंब्रम अपने बातों को बेवाक रखते हैं , और अपने ही पार्टी के विरुद्ध कई आरोप लगा चुके हैं। उनके साफ मनाना है विजय हांसदा सांसद रहते क्षेत्र का कोई विकास कार्य नहीं किया। जनता नाराज है और वे वाद्य होकर झामुमो की एकमात्र सीट बचाने के लिए चुनाव मैदान में है। किंतु अब वे केवल निष्कासित ही नहीं है बल्कि 6 वर्षों के लिए उनकी प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी गई है। अब ऐसे में सवाल उठता है तो उनका अगला कदम क्या होगा और मिशन क्या होगा। क्योंकि यह सभी जानते हैं की चुनाव का मुकाबला भाजपा एवं इंडिया गठबंधन के साथ है। एक पार्टी ऐसी भी है जो लोबिन पर कहीं कोई चर्चा नहीं करते। सदस्यता रद्द होने से अब श्री सोरेन यह कहीं नहीं बता पाएंगे कि मैं झारखंड मुक्ति मोर्चा का सदस्य हु। किंतु इतना कह सकते हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा हमारे दिल में है, अब देखना है दाम कितने बाजुए …. में है। और कितने दिनों तक झारखंड मुक्ति मोर्चा उनके दिलों में बसता है। किंतु रास्ते बहुत कठिन है चलना संभल संभल के, नेता तुम ही हो कल के … ?

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