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June 11, 2026 9:13 pm

स्कूलों में लापरवाही पर उपायुक्त का कड़ा एक्शन, 236 विद्यालयों की अनियमितता पर वेतन रोकने का निर्देश।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शत-प्रतिशत उपस्थिति और बेहतर परिणाम को लेकर डीसी ने कसी कमर, निरीक्षण से लेकर मध्याह्न भोजन तक सख्त निगरानी के निर्देश।

पाकुड़। जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और जवाबदेह बनाने को लेकर उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने सख्त रुख अपनाया है। समाहरणालय सभागार में आयोजित शिक्षा विभाग एवं जिला स्तरीय स्टीयरिंग सह मॉनिटरिंग समिति की समीक्षा बैठक में उन्होंने विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की जवाबदेही और मध्याह्न भोजन योजना की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि 189 विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर एक भी दिन दर्ज नहीं की गई, जबकि 47 विद्यालयों में पूरे माह में केवल एक दिन उपस्थिति दर्ज हुई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उपायुक्त ने संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन स्थगित करने का निर्देश दिया। वहीं 18 विद्यालयों में शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति नहीं मिलने पर संबंधित शिक्षकों का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को नियमित विद्यालय निरीक्षण करने और निरीक्षण के लिए मानक प्रपत्र तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें शौचालय, पेयजल, स्वच्छता, आईसीटी लैब, खेल मैदान, शिक्षण गुणवत्ता सहित अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। बैठक में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने, परीक्षा परिणाम में सुधार लाने और कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों के परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बेहतर परिणाम के लिए ठोस रणनीति बनाने का निर्देश दिया। मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता और नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने रसोइयों के लंबित मानदेय भुगतान में तेजी लाने तथा जर्जर किचन शेड की सूची तैयार कर मरम्मत एवं निर्माण की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी प्रखंडों को खाद्यान्न उठाव की प्रक्रिया समय पर पूरी करने और संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था और विद्यालय प्रमाणीकरण की समीक्षा करते हुए विद्यालयों को बेहतर श्रेणी में लाने के लिए कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की नींव हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, तकनीकी शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल से ही जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

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