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May 9, 2026 3:49 pm

प्रदेश से जिले तक संभावित नेतृत्व परिवर्तन की आशंका से भाजपा खेमे में पसरा सन्नाटा

ना जीत की खुशी, ना अनापेक्षित परिणाम पाने का गम

कैंची के बल पर I.N.D.I.A के पर कतरने की उम्मीद लगा बैठी जिला ईकाई

सुदीप कुमार त्रिवेदी

लोकसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम ना पाने के कारण को, भाजपा काफी गंभीरता से ले रही है एवं इस हेतु केंद्रीय नेतृत्व की ओर से कथित तौर पर सांगठनिक फेरबदल की कवायद भी तेज कर चुकी है, हालांकि इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने पूर्ण बहुमत के आँकड़े को पार कर लिया है एवं सरकार गठन की प्रक्रिया में आगे भी बढ़ चुका है, लेकिन चुनाव परिणाम व सरकार गठन की प्रक्रिया को लेकर पाकुड़ भाजपा जिला ईकाई में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है, ना जीत की खुशी और ना ही अनापेक्षित परिणाम मिलने का गम । पारंपरिक रूप से गुटों में बँटे रहने की आदत वाली पाकुड़ भाजपा के एक गुट में लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर काफी रोष है एवं वे अपनी भड़ास को गाहे बगाहे सोशल मीडिया के माध्यम से निकाल रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर आम जनता, चुनाव से ठीक पूर्व, जिले में अपनी गरिमामयी उपस्तिथि दर्ज करने वाले जिला स्तरीय नेताओं का चुनाव परिणाम के बाद ना देखे जाने पर सवाल भी उठा रहे हैं । भाजपा के इस प्रदर्शन पर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की अपनी शिकायत अलहदा है । बात कुरेदने के बाद नाम ना छापने की शर्त पर ग्रामीण इलाकों के कार्यकर्ताओं ने बताया कि वर्षों पहले भाजपा से अलग अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने वाले लोगों को प्रदेश का कमान देना एवं उनकी गणेश परिक्रमा करने वालों को ही तरजीह देने के कारण जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकर्ता आहत हैं । हालांकि उक्त शिकायत केवल ग्रामीण स्तर पर ही नही बल्कि जिला स्तर के कार्यकर्ताओं की भी है । भाजपा के सूत्रों की मानें तो चुनाव परिणाम के बाद प्रदेश से लेकर जिला तक होने वाले कथित सांगठनिक बदलाव को लेकर कई जिला स्तरीय नेता आशंकित हैं । इधर भाजपा के घटक दलों की भी अपनी शिकायत है जिनके द्वारा भाजपा के तयशुदा कार्यक्रम की जानकारी घटक दलों को ना देने की बात कही जा रही है । हाशिए पर धकेल दिए गए भाजपा के एक रणनीतिकार का कहना है कि चुनाव पूर्व तैयारी के पर्यवेक्षण के मद्देनजर ऐसे लोगों को दायित्व दिया गया, जिनकी खुद की राजनीतिक पकड़ उनके गृह जिले में नही है, वहीं जनसंघ के समय से जुड़े भाजपा के एक वयोवृद्ध कार्यकर्ता ने बताया कि लोबिन हेंब्रम के बगावत में ही अपनी जीत मान चुके स्थानीय नेता मृगमरीचिका में फँसकर रह गए ।

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